IIT कानपुर के अर्जव मोदी ने छोड़ी 40 लाख की नौकरी वाली लाइफ, बोले- पहाड़ों में आधी कमाई के बावजूद ज्यादा खुशी
अच्छी सैलरी और बड़े शहर की सुविधाओं को अक्सर सफलता की पहचान माना जाता है, लेकिन IIT कानपुर के पूर्व छात्र अर्जव मोदी की कहानी एक अलग सोच को सामने रखती है। उन्होंने बेंगलुरु की भागदौड़ भरी जिंदगी और पहाड़ों के शांत माहौल की तुलना करते हुए बताया कि कई बार कम कमाई में भी इंसान ज्यादा खुश रह सकता है।
अर्जव मोदी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में करीब 40 लाख रुपए के पैकेज वाली नौकरी और पहाड़ों की सुकून भरी जिंदगी के बीच बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, शहर में ज्यादा सुविधाएं और कमाई तो मिलती है, लेकिन तनाव, भागदौड़ और समय की कमी भी साथ आती है।
उन्होंने बताया कि पहाड़ों में जीवन की रफ्तार धीमी है। यहां लोग प्रकृति के करीब रहते हैं, अपने परिवार और आसपास के लोगों के साथ ज्यादा समय बिता पाते हैं। अर्जव का कहना है कि कम आय के बावजूद वहां रहने वाले लोगों में संतुष्टि और खुशी का स्तर अधिक दिखाई देता है।
अर्जव मोदी के मुताबिक, इंसान जहां रहता है, उसका वातावरण उसकी सोच और जीवनशैली को काफी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि शहरों में रहने वाले लोग अक्सर ज्यादा कमाने और आगे बढ़ने की दौड़ में लगे रहते हैं, जबकि पहाड़ों में लोग छोटी-छोटी चीजों में भी खुशी तलाश लेते हैं।
उन्होंने अपनी तुलना के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि जीवन में केवल पैसा ही खुशी का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता। मानसिक शांति, समय, प्रकृति से जुड़ाव और जीवन का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अर्जव की इस सोच को सोशल मीडिया पर भी काफी प्रतिक्रिया मिल रही है। कई लोगों ने उनके विचारों से सहमति जताई और कहा कि आधुनिक जीवन में लोग अक्सर अधिक कमाई के पीछे भागते हुए अपनी खुशियों और सुकून को नजरअंदाज कर देते हैं।
वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि हर व्यक्ति की प्राथमिकताएं अलग होती हैं। किसी के लिए करियर और आर्थिक सुरक्षा जरूरी हो सकती है, तो किसी के लिए शांत वातावरण और बेहतर जीवन गुणवत्ता ज्यादा मायने रख सकती है।
अर्जव मोदी की कहानी यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि सफलता का असली मतलब क्या है। क्या केवल बड़ी नौकरी और ज्यादा कमाई ही खुशहाल जीवन की पहचान है, या फिर वह जीवन बेहतर है जिसमें इंसान को अपने लिए समय, मानसिक शांति और संतुष्टि मिल सके? उनके अनुभव ने इसी सोच को एक नई दिशा दी है।