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“पैसे नहीं हैं तो बेटी भेज दो…” लेखपाल के कथित बयान से मचा हड़कंप!

 

उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से सरकारी कर्मचारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्ट के मुताबिक, मामला लालगंज तहसील क्षेत्र के मलेगांव का बताया जा रहा है।बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार का कच्चा मकान गिर गया था। इसी मामले में निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने के लिए कथित तौर पर लेखपाल मौके पर पहुंचे थे। महिला का आरोप है कि मकान गिरने की रिपोर्ट तैयार करने के बदले उससे पैसों की मांग की गई।

उत्तर प्रदेश लेखपाल साहब के बेशर्मी बोल!
पैसे नहीं है तो अपनी बेटी भेज देना काम हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश के रायबरेली के लालगंज तहसील स्थित मालेगांव का मामला बताया जा रहा है जहां एक पीड़ित परिवार का मिट्टी का घर गिर गया था तो लेखपाल साहब जाँच के लिए गये थें।

महिला ने आरोप लगाया है… pic.twitter.com/iVyzqopXyG

— Neeraj Chaurasiya (@NeerajC111) September 12, 2026

उत्तर प्रदेश लेखपाल साहब के बेशर्मी बोल!
पैसे नहीं है तो अपनी बेटी भेज देना काम हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश के रायबरेली के लालगंज तहसील स्थित मालेगांव का मामला बताया जा रहा है जहां एक पीड़ित परिवार का मिट्टी का घर गिर गया था तो लेखपाल साहब जाँच के लिए गये थें।

महिला ने आरोप लगाया है… pic.twitter.com/iVyzqopXyG

— Neeraj Chaurasiya (@NeerajC111) September 12, 2026



महिला का कहना है कि परिवार आर्थिक रूप से परेशान है और उसके पास देने के लिए पैसे नहीं थे। आरोप है कि जब महिला ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो वहां मौजूद उसकी बेटी की तरफ देखते हुए लेखपाल ने कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी।महिला के मुताबिक, लेखपाल ने कथित तौर पर कहा कि “पैसे नहीं हैं तो बेटी भेज दो, काम हो जाएगा।”

यह आरोप अगर सही साबित होता है तो मामला सिर्फ रिश्वत मांगने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक गरीब परिवार की गरिमा और सम्मान से जुड़े बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है।

जिस परिवार का घर गिर गया हो, जो सरकारी मदद और रिपोर्ट के लिए किसी अधिकारी के पास उम्मीद लेकर पहुंचे, अगर उसी परिवार से कथित तौर पर पैसे मांगे जाएं और पैसे न देने पर बेटी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की जाए, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?

सरकारी कर्मचारियों से उम्मीद की जाती है कि वे आम जनता की समस्याओं को समझें और जरूरतमंद लोगों की मदद करें। खासकर प्राकृतिक या किसी हादसे में घर गंवा चुके गरीब परिवार के लिए सरकारी प्रक्रिया आसान होनी चाहिए, न कि कथित तौर पर और परेशानी बढ़ाने वाली।

फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल दावे ने लोगों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग मामले की निष्पक्ष जांच और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, वायरल पोस्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और संबंधित लेखपाल का पक्ष सामने आना अभी जरूरी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में वास्तव में क्या हुआ था।लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—अगर कोई गरीब व्यक्ति सरकारी मदद की उम्मीद लेकर अधिकारी के पास जाए, तो क्या उसे अपनी मजबूरी के साथ-साथ अपने सम्मान की भी कीमत चुकानी पड़ेगी?