दो पत्नियों के बीच फंसा पति, पंचायत ने सुनाया अनोखा फैसला; 3-3 दिन का बंटा साथ, 7वें दिन मिली आजादी
दो पत्नियों के बीच फंसे एक पति को लेकर पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसकी चर्चा इलाके में हो रही है। विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत ने पति के समय को दोनों पत्नियों के बीच बांट दिया। तय व्यवस्था के मुताबिक पति तीन दिन पहली पत्नी के साथ और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा। सप्ताह का सातवां दिन उसे अपनी मर्जी से बिताने की छूट दी गई।
मामला सामने आने के बाद पंचायत के इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। आमतौर पर पारिवारिक विवादों में पंचायत समझौते और आपसी सहमति का रास्ता निकालने की कोशिश करती है, लेकिन इस मामले में पति के साथ रहने के दिनों का ही बंटवारा कर दिया गया।
दोनों पत्नियों के बीच विवाद के बाद हुई पंचायत
बताया जा रहा है कि पति और उसकी दोनों पत्नियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था। मामला बढ़ने के बाद परिवार और समाज के लोगों ने पंचायत बुलाकर विवाद सुलझाने की कोशिश की। पंचायत में दोनों पक्षों की बात सुनी गई और इसके बाद पति के रहने की व्यवस्था तय की गई।
फैसले के अनुसार सप्ताह के छह दिन दोनों पत्नियों के बीच बराबर बांट दिए गए। पति को तीन दिन पहली पत्नी और तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ रहने की बात कही गई। इसके बाद सातवें दिन उसे किसी के साथ रहने के लिए बाध्य नहीं किया गया।
फैसले की इलाके में हो रही चर्चा
पंचायत का यह फैसला सामने आने के बाद लोग हैरानी जता रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पारिवारिक विवादों को स्थानीय स्तर पर सुलझाने के लिए पंचायतों में अलग-अलग तरह के समझौते कराए जाते हैं। वहीं, कुछ लोग इस तरह के फैसलों की कानूनी स्थिति को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।
यह भी महत्वपूर्ण है कि पंचायत का फैसला अपने आप में न्यायालय का आदेश नहीं होता। किसी वैवाहिक विवाद में अधिकारों और वैवाहिक स्थिति से जुड़े मामलों पर लागू कानून और सक्षम अदालत का निर्णय ही कानूनी रूप से महत्वपूर्ण होता है।
फिलहाल तीन-तीन दिन के इस बंटवारे और सातवें दिन की आजादी वाले पंचायत फैसले ने लोगों का ध्यान खींच लिया है। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पति-पत्नी के विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत ने ऐसा तरीका अपनाया, जिसकी आमतौर पर कल्पना कम ही की जाती है।