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कैमरे में कैद हुआ खौफनाक मंजर, गंगा में बह गया मंदिर

 

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रतुआ इलाके से एक बेहद भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। गंगा नदी के तेज कटाव के चलते यहां का एक ऐतिहासिक शिव मंदिर नदी की धारा में समा गया। बताया जा रहा है कि यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना था और लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ था।गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने मालदा और आसपास के इलाकों में हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नदी का तेज बहाव और उसके किनारे हो रहा भीषण कटाव साफ नजर आ रहा है। इसी कटाव की चपेट में आने के बाद मंदिर का अस्तित्व भी खत्म हो गया।

🚨 पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रतुआ क्षेत्र में गंगा नदी के भीषण कटाव के कारण एक ऐतिहासिक शिव मंदिर नदी में समा गया. मंदिर सैकड़ों साल पुराना बताया जा रहा है।
फरक्का से लगभग 12,00,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है,जिससे इस क्षेत्र में जलस्तर बढ़ता चला गया।
गंगा की लगभग सभी प्रमुख… pic.twitter.com/v9vt5mchrs

— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) September 7, 2026

🚨 पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रतुआ क्षेत्र में गंगा नदी के भीषण कटाव के कारण एक ऐतिहासिक शिव मंदिर नदी में समा गया. मंदिर सैकड़ों साल पुराना बताया जा रहा है।
फरक्का से लगभग 12,00,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है,जिससे इस क्षेत्र में जलस्तर बढ़ता चला गया।
गंगा की लगभग सभी प्रमुख… pic.twitter.com/v9vt5mchrs

— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) September 7, 2026


बताया जा रहा है कि फरक्का से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद इस इलाके में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। वहीं, गंगा की कई प्रमुख सहायक नदियों में भी उफान की स्थिति बनी हुई है। इसके कारण मालदा और मुर्शिदाबाद समेत निचले इलाकों में बाढ़ के साथ-साथ नदी के कटाव का खतरा भी बढ़ गया है।

स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक मंदिर का नदी में समाना नहीं है। यह उनकी आस्था, इतिहास और वर्षों पुरानी धार्मिक विरासत से जुड़ा नुकसान है। जिस स्थान पर कभी श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते थे, आज वहां गंगा की तेज धार बह रही है।

गंगा का कटाव पश्चिम बंगाल के कई इलाकों के लिए लंबे समय से बड़ी चुनौती रहा है। हर साल नदी के किनारे बसे गांवों, खेतों और धार्मिक स्थलों को कटाव का सामना करना पड़ता है। कई बार लोग अपनी जमीन और घर तक खो देते हैं।

मालदा की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि लगातार बढ़ते नदी कटाव से ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं? क्या ऐसी विरासतों को सुरक्षित रखने के लिए समय रहते कोई ठोस योजना बनाई जा सकती है?

फिलहाल मंदिर के नदी में समाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में हैं। यह दृश्य न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए भावुक कर देने वाला है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि प्रकृति की ताकत के सामने सदियों पुरानी संरचनाएं भी कितनी असुरक्षित हो सकती हैं।