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 जमुई कांड के मुख्य आरोपी का हाफ एनकाउंटर, वीडियो वायरल करने वाला भी गिरफ्तार

 

पुलिस ने जमुई की घटना को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य आरोपी, जिसने एक युवती के साथ छेड़छाड़ की थी, उसे पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। खबरों के मुताबिक, एक और आरोपी का पैर भी टूट गया। इस मामले में शामिल संदिग्धों को पकड़ने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई थी; नंदन यादव और अन्य आरोपी फरार थे और पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। खबर है कि पुलिस और नंदन यादव के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें पुलिस ने उसके पैर में गोली मार दी। माना जा रहा है कि इस मामले के सभी आरोपियों को अब गिरफ्तार कर लिया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नंदन यादव ने पहले पुलिस पर गोली चलाई; पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और उसके पैर में गोली लग गई। RJD और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर नैतिक आधार पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के इस्तीफे की मांग की है।

जमुई वायरल वीडियो मामले की मुख्य बातें:
जमुई वायरल वीडियो मामला (रात 8:00 बजे का अपडेट): जमुई घटना पर टिप्पणी करते हुए JD(U) विधायक अनंत सिंह ने कहा कि ऐसे काम करने वालों को तुरंत मार दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे दरिंदों को जहां भी मिलें, खत्म कर देना चाहिए और यह एनकाउंटर ज़रूरी था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बलात्कारी मौत के हकदार हैं—भले ही ऐसा रोज़ हो। पूरी कहानी पढ़ें। पटना में एक कार्यक्रम में बोलते हुए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि अपराधी सिर्फ़ अपराधी होता है और उसकी कोई जाति नहीं होती। उन्होंने चेतावनी दी कि जो अपराधी पुलिस को चुनौती देंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इस बयान को जमुई घटना में आरोपी के पैर में पुलिस की गोली लगने के संदर्भ में देखा जा रहा है। पूरी कहानी पढ़ें।

रमाशिश चौधरी को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है, जिसमें जमुई में सड़क पर एक मनचली भीड़ को एक युवती के साथ छेड़छाड़ करते हुए दिखाया गया था। पुलिस अधीक्षक (SP) ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। पता चला है कि उसी ने वीडियो अपलोड किया था, जो बाद में वायरल हो गया।

जमुई ज़िले का वह इलाका जहाँ नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना हुई, सूर्यास्त के बाद सुनसान हो जाता है। अंधेरा होने के बाद, बदमाश मडवा पहाड़ी की ओर जाने वाली सड़क पर घात लगाकर बैठते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं पहले भी यहां हो चुकी हैं, लेकिन सामाजिक बदनामी के डर से पुलिस को कभी इसकी सूचना नहीं दी गई। फिर भी, पुलिस की सतर्कता और गश्त में कमी गंभीर सवाल खड़े करती है।