पोते ने दादा की सेहत के लिए बनाया AI ऐप, तो CEO की 90 सेकंड की मुलाकात ने सिखाया रिश्तों का महत्व
आज के दौर में जहां तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं कुछ लोग इसका इस्तेमाल मानवीय भावनाओं और रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए कर रहे हैं। चीन के 18 वर्षीय छात्र मा काई ने अपने दादा की दवाइयों की चिंता को दूर करने के लिए एक ऐसा AI आधारित ऐप बना दिया, जो बुजुर्गों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। वहीं दूसरी ओर YesMadam के CEO आदित्य आर्य की एक छोटी-सी भावुक मुलाकात ने भी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है।
दादा की चिंता ने पोते को बनाया इनोवेटर
चीन के छात्र मा काई ने देखा कि उनके दादा को नियमित दवाइयां लेने में परेशानी होती थी। कई बार उम्र के कारण दवा लेने का समय याद रखना मुश्किल हो जाता था। इसी समस्या को दूर करने के लिए मा काई ने AI तकनीक पर आधारित एक ऐप तैयार किया।
यह ऐप दवा लेने का समय याद दिलाता है और दवाओं की एक्सपायरी डेट पहचानने में भी मदद करता है। इसके जरिए बुजुर्गों को अपनी दवाइयों का बेहतर प्रबंधन करने में सहायता मिल सकती है।
मा काई की इस पहल की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि उन्होंने तकनीक को केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्य की जिंदगी आसान बनाने के लिए इस्तेमाल किया है। इतनी कम उम्र में उनकी यह सोच और इनोवेशन कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
CEO आदित्य आर्य की 90 सेकंड की मुलाकात हुई वायरल
दूसरी ओर, YesMadam के CEO आदित्य आर्य की एक सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है। उन्होंने बताया कि व्यस्त शेड्यूल के बीच उन्हें एयरपोर्ट पर अपनी पत्नी से मिलने के लिए केवल 90 सेकंड का समय मिला।
आदित्य आर्य ने इस छोटी-सी मुलाकात को बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि भले ही समय बहुत कम था, लेकिन वह पल उनके लिए भावनात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण था। उनकी पोस्ट में रिश्तों की अहमियत और काम के दबाव के बीच निजी जिंदगी के लिए समय निकालने का संदेश दिखाई दिया।
उनकी इस भावुक पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि सफलता और करियर के साथ-साथ परिवार और रिश्तों को समय देना भी जरूरी है।
तकनीक और रिश्तों की दो प्रेरणादायक कहानियां
मा काई और आदित्य आर्य की ये दोनों कहानियां अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों एक ही संदेश देती हैं। जहां मा काई ने तकनीक के जरिए अपने दादा की जिंदगी आसान बनाने की कोशिश की, वहीं आदित्य आर्य ने दिखाया कि व्यस्त जिंदगी में भी अपनों के लिए छोटे-छोटे पल कितने मायने रखते हैं।
आज के समय में जब लोग काम और जिम्मेदारियों में उलझे रहते हैं, ऐसी कहानियां याद दिलाती हैं कि असली सफलता केवल उपलब्धियों में नहीं, बल्कि अपने लोगों के लिए समय और संवेदनशीलता रखने में भी है।