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दादा की दवाइयों की चिंता ने 18 साल के पोते को बनाया इनोवेटर, AI ऐप करेगा दवा लेने की याद और एक्सपायरी की पहचान

 

चीन के 18 वर्षीय छात्र मा काई इन दिनों अपनी एक अनोखी पहल को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उन्होंने अपने दादा की दवाइयों का समय पर ध्यान रखने के लिए एक ऐसा AI आधारित ऐप तैयार किया है, जो न सिर्फ दवा लेने की याद दिलाता है, बल्कि एक्सपायर्ड दवाओं की पहचान करने में भी मदद करता है। पोते की इस पहल की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि मा काई ने अपने दादा की दवाइयों को लेकर होने वाली परेशानियों को करीब से देखा। उम्र बढ़ने के साथ कई लोगों को अलग-अलग समय पर कई दवाइयां लेनी पड़ती हैं। ऐसे में कभी दवा लेने का समय भूल जाना तो कभी किसी दवा की एक्सपायरी डेट पर ध्यान न देना परेशानी का कारण बन सकता है। इसी समस्या को देखते हुए मा काई ने तकनीक की मदद से इसका समाधान खोजने का फैसला किया।

उन्होंने AI तकनीक पर आधारित एक ऐप विकसित किया है, जिसे बुजुर्गों के लिए दवाइयों की निगरानी आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। ऐप का एक प्रमुख फीचर दवा लेने का रिमाइंडर है। यूजर दवा और उसके सेवन का समय दर्ज कर सकता है, जिसके बाद तय समय पर ऐप उसे दवा लेने की याद दिलाता है।

इस ऐप की खासियत सिर्फ रिमाइंडर तक सीमित नहीं है। इसमें दवाइयों की एक्सपायरी को पहचानने की सुविधा भी दी गई है। दावा है कि ऐप दवा के पैकेट या लेबल की जानकारी को AI की मदद से पढ़कर उसकी एक्सपायरी डेट पहचान सकता है। इससे घर में रखी पुरानी दवाइयों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने में मदद मिल सकती है।

मा काई की इस पहल ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान इसलिए भी खींचा है क्योंकि उन्होंने तकनीक का इस्तेमाल किसी व्यावसायिक उद्देश्य के बजाय अपने परिवार की रोजमर्रा की जरूरत को पूरा करने के लिए किया। लोगों का कहना है कि बुजुर्गों की समस्याओं को समझकर उनके लिए तकनीकी समाधान तैयार करना युवा पीढ़ी की सकारात्मक सोच को दिखाता है।

हालांकि, किसी भी AI ऐप से दवा की पहचान या एक्सपायरी डेट की जांच करने के बावजूद दवा इस्तेमाल करने से पहले पैकेट पर लिखी जानकारी और जरूरत पड़ने पर फार्मासिस्ट या डॉक्टर से पुष्टि करना जरूरी है। AI आधारित सिस्टम मददगार हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

मा काई की कहानी यह दिखाती है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल मनोरंजन या सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार के बुजुर्ग सदस्यों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए भी किया जा सकता है। यही वजह है कि 18 वर्षीय छात्र की यह पहल सोशल मीडिया पर लोगों की तारीफ बटोर रही है।