उम्रकैद का दोषी बना सरकारी टीचर, फिर भी मिलता रहा वेतन; हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
एक सरकारी शिक्षक को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा मिलने के बावजूद वेतन भुगतान जारी रहने का मामला सामने आया है। इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने अधिकारियों से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामला उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक विद्यालय से जुड़ा है, जहां तैनात एक सहायक अध्यापक को हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद उसके वेतन भुगतान को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
14 साल जेल में रहने के बाद मिली थी जमानत
जानकारी के मुताबिक, शिक्षक ने उम्रकैद की सजा के तहत करीब 14 साल जेल में बिताए थे। इसके बाद उसे जमानत मिली, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल जमानत मिलने से दोषसिद्धि खत्म नहीं हो जाती।हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को जमानत मिलना उसकी सजा या दोषी ठहराए जाने के आदेश को समाप्त नहीं करता। ऐसे में सेवा में बने रहने और सरकारी वेतन पाने के अधिकार को लेकर नियमों के तहत फैसला होना चाहिए।
वेतन भुगतान पर उठे सवाल
मामले में विद्यालय प्रबंधन की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इसमें उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत संबंधित शिक्षक के वेतन भुगतान के लिए व्यवस्था की गई थी।याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि उम्रकैद की सजा पाए व्यक्ति को सरकारी सेवा से जुड़े लाभ मिलना नियमों के खिलाफ है। वहीं, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से रिकॉर्ड और पूरी जानकारी मांगी है।
शिक्षा विभाग से मांगी गई रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि दोषसिद्ध कर्मचारी के खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई की गई और वेतन भुगतान किस आधार पर जारी रखा गया।
सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी विभागों में रिकॉर्ड जांच और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने यह साफ किया है कि किसी कर्मचारी की दोषसिद्धि के बाद उसके सेवा लाभों को लेकर नियमों का पालन जरूरी है।अब हाईकोर्ट की जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वेतन भुगतान में किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।