Appraisal के नाम पर ‘गुडी बैग’! सैलरी हाइक की उम्मीद लगाए कर्मचारियों को मिला बड़ा झटका
कॉर्पोरेट दुनिया में हर साल होने वाला Appraisal कर्मचारियों के लिए उम्मीदों और सपनों का समय माना जाता है। कोई प्रमोशन की आस लगाता है, तो कोई बेहतर सैलरी हाइक की उम्मीद करता है। लेकिन हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नौकरीपेशा लोगों को हैरान और नाराज कर दिया है। एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को सैलरी बढ़ाने के बजाय “गुडी बैग” थमा दिया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर दौड़ गई।
जानकारी के मुताबिक, कंपनी के कर्मचारियों को उम्मीद थी कि इस बार उनके प्रदर्शन के आधार पर वेतन में अच्छी बढ़ोतरी मिलेगी। कई कर्मचारियों ने पूरे साल अतिरिक्त घंटे काम किया, टारगेट पूरे किए और कंपनी की ग्रोथ में योगदान दिया। लेकिन Appraisal मीटिंग के दौरान जब कर्मचारियों को बुलाया गया, तो उन्हें सैलरी हाइक लेटर की जगह एक छोटा सा गिफ्ट बैग पकड़ा दिया गया।
बताया जा रहा है कि उस गुडी बैग में कुछ सामान्य चीजें थीं, जैसे कॉफी मग, स्नैक्स, पानी की बोतल और कंपनी का लोगो लगा हुआ स्टेशनरी आइटम। कर्मचारियों को यह देखकर बड़ा झटका लगा, क्योंकि वे महीनों से वेतन बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे। कई कर्मचारियों ने इसे “मजाक” और “अपमान” तक बता दिया।
सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें और पोस्ट वायरल होते ही नेटिजन्स ने कंपनी की जमकर आलोचना शुरू कर दी। लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और काम के दबाव के बीच कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन वृद्धि मिलनी चाहिए, न कि प्रतीकात्मक गिफ्ट। कई यूजर्स ने लिखा कि “कर्मचारियों की मेहनत का जवाब कॉफी मग से नहीं दिया जा सकता।”
कुछ लोगों ने इसे कॉर्पोरेट कल्चर की संवेदनहीनता बताया। उनका कहना है कि कंपनियां अक्सर “Employee Appreciation” के नाम पर छोटे-मोटे गिफ्ट देकर कर्मचारियों की असली जरूरतों को नजरअंदाज कर देती हैं। वहीं, कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “अब शायद EMI भी गुडी बैग से भरनी पड़ेगी।”
HR विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की संतुष्टि केवल मोटिवेशनल भाषण या गिफ्ट से नहीं बढ़ती। यदि कर्मचारियों को उनके काम के अनुसार आर्थिक लाभ नहीं मिलता, तो इससे उनका मनोबल गिरता है और कंपनी के प्रति भरोसा भी कम होता है। खासतौर पर ऐसे समय में, जब बाजार में महंगाई लगातार बढ़ रही है, वेतन वृद्धि कर्मचारियों के लिए बेहद अहम हो जाती है।
यह मामला एक बार फिर कॉर्पोरेट सेक्टर में कर्मचारियों की अपेक्षाओं और कंपनियों की नीतियों के बीच बढ़ती दूरी को उजागर करता है। सोशल मीडिया पर लोग अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या कंपनियों को “Employee Welfare” के नाम पर केवल दिखावटी कदम उठाने के बजाय वास्तविक आर्थिक सहयोग पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
फिलहाल, यह मामला इंटरनेट पर बहस का बड़ा विषय बना हुआ है और हजारों नौकरीपेशा लोग इससे खुद को जोड़कर देख रहे हैं।