लड़की ने रख लिया खुद का ऐसा नाम, 16 साल बाद भी नहीं बन पाया पासपोर्ट
नाम बदलना कई लोगों के लिए एक निजी फैसला होता है, जो कभी धार्मिक, कानूनी या भावनात्मक कारणों से लिया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि किसी का बदला हुआ नाम उसकी पहचान का ही संकट बन जाए? ऐसा ही हुआ ब्रिटेन की एक महिला के साथ, जिन्होंने साल 2009 में एक चैरिटी अभियान के तहत अपना नाम बदलकर 'पुडसे बियर' (Pudsey Bear) रख लिया। लेकिन अब 16 साल बीतने के बाद भी वह पासपोर्ट नहीं बनवा पा रही हैं।
यह कहानी सिर्फ एक नाम की नहीं, बल्कि व्यवस्था से टकराव और कानूनी पेचों की भी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिससे एक महिला का नाम उसका सबसे बड़ा संघर्ष बन गया।
चैरिटी के लिए बदला नाम
इस महिला का असली नाम एलीन डी बोंट (Eileen De Bont) था। साल 2009 में उन्होंने बीबीसी के 'चिल्ड्रन इन नीड' कार्यक्रम के तहत चैरिटी के लिए एक अनोखा कदम उठाया – अपने नाम की नीलामी। यह एक मजेदार और अलग तरीका था लोगों का ध्यान खींचने और चैरिटी के लिए पैसे जुटाने का। इस नीलामी में 4 हजार पाउंड (करीब 4.4 लाख रुपये) की सबसे ऊंची बोली लगी और इसके बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर 'पुडसे बियर' रख लिया।
सभी दस्तावेजों में है नया नाम
बदले हुए नाम को उन्होंने सिर्फ एक मजाक या अभियान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बैंक अकाउंट, टैक्स रिकॉर्ड, वोटर आईडी, बिजनेस रजिस्ट्रेशन सहित सभी आधिकारिक दस्तावेजों में अपना नया नाम 'पुडसे बियर' ही दर्ज कराया। उनका टैरो कार्ड रीडिंग बिजनेस भी इसी नाम से रजिस्टर्ड है और यूट्यूब पर उनकी एक बड़ी फॉलोइंग भी इसी नाम से है।
पासपोर्ट नहीं बना, कारण जानकर चौंक जाएंगे
हालांकि सभी दस्तावेजों में नाम बदलने के बावजूद यूके पासपोर्ट ऑफिस ने उनके नाम को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि 'पुडसे बियर' एक 'हल्का-फुल्का नाम' है और यह कॉपीराइट का उल्लंघन भी कर सकता है, क्योंकि यह नाम बीबीसी के फेमस मस्कॉट का नाम है, जो 1985 से 'चिल्ड्रन इन नीड' का चेहरा रहा है।
साल 2009 में भी उनकी पासपोर्ट अर्जी खारिज कर दी गई थी और हाल ही में जब उन्होंने फिर आवेदन किया, तब भी वही जवाब मिला – “कॉपीराइट के कारण हम यह नाम पासपोर्ट पर स्वीकार नहीं कर सकते।”
महिला की जिद – नाम नहीं बदलूंगी
महिला का कहना है, “मैं 16 साल से इसी नाम से जी रही हूं। मेरी पहचान, मेरा बिजनेस, मेरी ऑनलाइन फॉलोइंग सब इसी नाम पर है। मैं पासपोर्ट पर भी इसी नाम को देखना चाहती हूं।” वह यह नाम बदलने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अब इसे एक व्यक्तिगत पहचान के रूप में स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ एक मजाक नहीं, उनकी पहचान का हिस्सा बन चुका है।
पासपोर्ट ऑफिस का सुझाव
पासपोर्ट ऑफिस ने महिला को बीबीसी से आधिकारिक अनुमति लेने का सुझाव दिया है ताकि कॉपीराइट संबंधी आपत्ति को दूर किया जा सके। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि बीबीसी इस तरह की अनुमति देगा या नहीं, क्योंकि 'पुडसे बियर' ब्रांड बीबीसी के लिए एक अहम पहचान है।
सोशल मीडिया पर मिला समर्थन
यह मामला अब धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कई लोग महिला के हक में खड़े हो गए हैं और कह रहे हैं कि अगर सारे दस्तावेज़ एक नाम पर हैं तो पासपोर्ट क्यों नहीं दिया जा रहा? कुछ लोग इसे निजता के अधिकार और व्यक्तिगत पहचान की आज़ादी से जोड़ रहे हैं।
निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि कानूनी और सामाजिक व्यवस्थाएं कितनी जटिल हो सकती हैं, खासकर जब बात व्यक्तिगत पहचान की हो। एक ओर महिला की कोशिश थी चैरिटी के लिए कुछ नया और अनोखा करने की, और दूसरी ओर वो अब सिस्टम की उलझनों में फंसी हुई हैं। उनका नाम उनके लिए गर्व और पहचान की बात बन गया है, लेकिन कानूनी रूप से यह अब तक स्वीकार नहीं हो सका।
अब देखना ये होगा कि क्या बीबीसी से अनुमति मिलने के बाद उन्हें पासपोर्ट मिलेगा या फिर ये कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।