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जन्म से लेकर आखिरी सांस तक! मां सीता-प्रभु राम के विवाह में पहली बार बजा था बिहार का ये पंचबजना, जानें पूरी कहानी

 

बिहार की संस्कृति और परंपराओं की अपनी एक अलग पहचान है। यहां शादी-विवाह से लेकर जन्म और मृत्यु तक कई ऐसी लोक परंपराएं हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं। इन्हीं में से एक है पंचबजना, जिसे बिहार की पारंपरिक लोक वाद्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इससे जुड़ी मान्यता भगवान राम और माता सीता के विवाह से भी जोड़ी जाती है।

स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार, माता सीता और भगवान राम के विवाह के अवसर पर पंचबजना बजाया गया था। हालांकि इस दावे का आधार मुख्य रूप से लोककथाएं और क्षेत्रीय परंपराएं हैं, लेकिन बिहार के कई इलाकों में आज भी इस वाद्य परंपरा को धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ देखा जाता है।

पंचबजना नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें पांच तरह के पारंपरिक वाद्य यंत्रों का समूह शामिल होता है। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इन वाद्यों के नाम और संयोजन में अंतर देखने को मिलता है। इन वाद्य यंत्रों से निकलने वाली सामूहिक ध्वनि किसी भी मांगलिक आयोजन के माहौल को खास बना देती है।

बिहार के ग्रामीण इलाकों में पंचबजना का इस्तेमाल केवल विवाह समारोह तक सीमित नहीं रहा है। जन्म जैसे शुभ अवसरों पर भी पारंपरिक वाद्य बजाने की परंपरा रही है। वहीं कुछ समुदायों में जीवन के अंतिम संस्कारों से जुड़ी परंपराओं में भी पारंपरिक वाद्यों का इस्तेमाल देखने को मिलता है। इसी वजह से इसे इंसान के जीवन के अलग-अलग पड़ावों से जोड़कर देखा जाता है।

पंचबजना केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति और सामुदायिक जीवन का हिस्सा रहा है। गांवों में पारंपरिक कलाकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इन वाद्यों को बजाने की कला सीखते रहे हैं। किसी समारोह में पंचबजना बजना उस आयोजन की पारंपरिक पहचान माना जाता रहा है।

हालांकि आधुनिक समय में डीजे और इलेक्ट्रॉनिक संगीत के बढ़ते चलन के कारण पारंपरिक वाद्य धीरे-धीरे सीमित होते जा रहे हैं। इसके बावजूद बिहार के कई गांवों और सांस्कृतिक आयोजनों में पंचबजना की परंपरा आज भी जीवित है।

लोक संस्कृति से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसी परंपराएं किसी क्षेत्र के इतिहास, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक पहचान को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पंचबजना भी बिहार की ऐसी ही विरासत है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।

राम-सीता विवाह से जुड़ी मान्यता हो या बिहार के लोकजीवन की परंपरा, पंचबजना आज भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है। यही वजह है कि यह पारंपरिक संगीत आज भी लोगों को अपनी संस्कृति और पुरानी परंपराओं से जोड़ता है।