पहले Insurance, फिर खुलेगा SBI Account? वायरल Video ने बैंकिंग सिस्टम पर उठाए सवाल!
बैंक में सेविंग अकाउंट खुलवाने पहुंचे एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। युवक का आरोप है कि जब वह SBI में सेविंग अकाउंट खुलवाने पहुंचा, तो उससे पहले एक्सीडेंटल इंश्योरेंस लेने के लिए कहा गया।युवक के मुताबिक, बैंक कर्मचारियों ने उससे कहा कि अगर वह इंश्योरेंस नहीं करवाता है तो शाखा में उसका अकाउंट नहीं खोला जाएगा। इसके बाद जब उसने बैंक मैनेजर से इस बारे में बात की तो कथित तौर पर उसे भी इंश्योरेंस करवाने के लिए कहा गया।मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। युवक का दावा है कि उसे यह भी कहा गया कि अगर वह इंश्योरेंस नहीं करवाना चाहता तो वह कस्टमर सर्विस सेंटर यानी CSP जाकर अपना अकाउंट खुलवा सकता है।अब इसी दावे को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्या बैंक में सेविंग अकाउंट खुलवाने के लिए इंश्योरेंस लेना जरूरी है?
SBI Bank का Insurance Scam Exposed 😡
— Subhajit Das (@SantaniSubhajit) September 18, 2026
Is it necessary to take insurance to open a savings account in SBI? If not, the account will not be opened in the branch. Is this the rule of RBI?
When a boy went to SBI bank to open his savings account, he was told that he would have to… pic.twitter.com/7G3wiBVucB
SBI Bank का Insurance Scam Exposed 😡
— Subhajit Das (@SantaniSubhajit) September 18, 2026
Is it necessary to take insurance to open a savings account in SBI? If not, the account will not be opened in the branch. Is this the rule of RBI?
When a boy went to SBI bank to open his savings account, he was told that he would have to… pic.twitter.com/7G3wiBVucB
क्या SBI में अकाउंट खोलने के लिए Insurance जरूरी है?
SBI की उपलब्ध आधिकारिक Depositors’ Rights Policy में सेविंग अकाउंट खोलने के लिए KYC और बैंक की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की बात कही गई है। बैंक के सेविंग अकाउंट फॉर्म में भी अकाउंट खोलने के लिए KYC और जरूरी दस्तावेजों से जुड़ी शर्तें दी गई हैं।
वहीं, SBI की नीति में इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और दूसरे थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की क्रॉस-सेलिंग का प्रावधान मौजूद है। इसका मतलब यह है कि बैंक अपने ग्राहकों को ऐसे प्रोडक्ट ऑफर कर सकता है, लेकिन इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि सामान्य सेविंग अकाउंट खोलने के लिए ग्राहक को इंश्योरेंस खरीदना ही पड़ेगा।
फिर विवाद किस बात पर है?
विवाद का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर ग्राहक ने इंश्योरेंस लेने से इनकार किया, तो क्या सिर्फ इसी वजह से उसका सेविंग अकाउंट खोलने से मना किया जा सकता है?
अगर किसी ग्राहक को वास्तव में ऐसा कहा गया है कि “पहले इंश्योरेंस करवाओ, तभी अकाउंट खुलेगा”, तो उसे बैंक से इस शर्त का लिखित आधार और संबंधित नियम पूछना चाहिए।
क्योंकि बैंकिंग प्रोडक्ट की बिक्री और किसी जरूरी बैंकिंग सेवा को किसी दूसरे प्रोडक्ट की खरीद से जोड़ने के बीच फर्क होता है।
ग्राहक क्या कर सकता है?
अगर किसी ग्राहक को अकाउंट खोलने के लिए जबरन इंश्योरेंस लेने के लिए कहा जाता है, तो वह सबसे पहले बैंक से इसकी जानकारी लिखित रूप में मांग सकता है।
ग्राहक यह भी पूछ सकता है कि:
- इंश्योरेंस लेना किस नियम के तहत जरूरी है?
- क्या यह अकाउंट खोलने की आधिकारिक शर्त है?
- इंश्योरेंस के बिना अकाउंट क्यों नहीं खोला जा रहा?
- इसकी जानकारी बैंक के किस आधिकारिक दस्तावेज में दी गई है?
अगर बैंक की ओर से समाधान नहीं मिलता है तो ग्राहक बैंक की आधिकारिक शिकायत व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर संबंधित नियामकीय शिकायत प्रणाली का इस्तेमाल कर सकता है।
सोशल मीडिया के दावे पर भी रखें ध्यान
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या पोस्ट देखकर तुरंत इसे “इंश्योरेंस स्कैम” कहना उचित नहीं होगा। यह किसी एक शाखा में हुई घटना या ग्राहक के अनुभव का मामला भी हो सकता है।
लेकिन अगर किसी शाखा में वास्तव में सेविंग अकाउंट खोलने के लिए इंश्योरेंस को अनिवार्य बनाया जा रहा है, तो यह जरूर सवाल खड़ा करता है कि ऐसी शर्त का आधिकारिक आधार क्या है।
इसलिए सबसे जरूरी बात है कि ग्राहक आरोप और बैंक के आधिकारिक नियम—दोनों को सामने रखकर ही मामले की सच्चाई तय की जाए।