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मैथ्स के डर ने बनाया जीनियस! जानिए कैसे सबसे कम उम्र का प्रोग्रामर बना 8 साल का यह बच्चा

 

गणित का नाम सुनकर जहां कई बच्चों को मुश्किल सवालों की चिंता होने लगती है, वहीं ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाले नोआ विलियम्स ने गणित की समस्याओं को हल करने के लिए कोडिंग का सहारा लिया। यही शुरुआत आगे चलकर उनकी ऐसी उपलब्धि में बदल गई, जिसने उन्हें दुनिया का सबसे कम उम्र का प्रोफेशनल कंप्यूटर प्रोग्रामर बना दिया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने नोआ को इस उपलब्धि के लिए मान्यता दी है।

मैथ्स की समस्या हल करने के लिए शुरू की कोडिंग

नोआ ने महज 6 साल की उम्र में गणित से जुड़े सवालों और गणनाओं में मदद के लिए प्रोग्रामिंग सीखना शुरू किया था। शुरुआत में कोडिंग उनके लिए गणित को आसान बनाने का एक तरीका थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें उनकी रुचि बढ़ती गई। उन्होंने C++ जैसी प्रोग्रामिंग भाषा सीख ली और कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार करने लगे।

कम उम्र में ही उनकी प्रोग्रामिंग क्षमता इतनी आगे बढ़ गई कि उन्होंने पेशेवर स्तर का प्रोग्राम तैयार किया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, 8 अगस्त 2025 को जब नोआ की उम्र 8 साल 307 दिन थी, तब एक स्वतंत्र कंपनी ने उनके बनाए प्रोग्राम को प्रकाशित किया। इसी आधार पर उन्हें सबसे कम उम्र के प्रोफेशनल कंप्यूटर प्रोग्रामर के तौर पर मान्यता मिली।

7 साल की उम्र में Mensa से जुड़े

नोआ की उपलब्धियां सिर्फ प्रोग्रामिंग तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 7 साल की उम्र में उन्होंने Mensa की सदस्यता हासिल की थी। उनका IQ स्कोर 99.9वें पर्सेंटाइल में बताया गया है। हालांकि, उनकी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कोडिंग की शुरुआत किसी रिकॉर्ड को बनाने के लिए नहीं, बल्कि गणित से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए हुई थी।

अब रोबोटिक्स और ड्रोन में भी दिलचस्पी

प्रोग्रामिंग के बाद नोआ की रुचि अब रोबोटिक्स और ड्रोन जैसी तकनीकों में भी बढ़ रही है। उनकी कहानी बताती है कि बच्चों की किसी विषय को लेकर परेशानी या जिज्ञासा कभी-कभी उन्हें उसी समस्या का नया समाधान खोजने के लिए प्रेरित कर सकती है।

नोआ की उपलब्धि को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इतनी कम उम्र में उन्होंने प्रोग्रामिंग को केवल सीखने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपने काम को पेशेवर स्तर तक पहुंचाया।