मैथ्स के डर ने बनाया जीनियस! जानिए कैसे सबसे कम उम्र का प्रोग्रामर बना 8 साल का यह बच्चा
गणित का नाम सुनते ही कई बच्चों के चेहरे पर परेशानी नजर आने लगती है, लेकिन एक बच्चे की कहानी बिल्कुल अलग है। मैथ्स से डरने वाले इस बच्चे ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया कि वह बेहद कम उम्र में प्रोग्रामर के तौर पर चर्चा में आ गया। 8 साल की उम्र में प्रोग्रामिंग सीखने और कोड लिखने की उसकी कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है।
बताया जाता है कि बच्चे को शुरुआत में गणित काफी मुश्किल लगता था। सवाल हल करने में परेशानी और संख्याओं को लेकर झिझक के बीच उसकी दिलचस्पी कंप्यूटर की तरफ बढ़ने लगी। कंप्यूटर पर काम करते हुए उसे धीरे-धीरे यह समझ आया कि कोडिंग के जरिए किसी समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर हल किया जा सकता है। इसके बाद प्रोग्रामिंग उसके लिए पढ़ाई के बजाय एक तरह का खेल और प्रयोग बन गई।
बच्चे ने कम उम्र में ही प्रोग्रामिंग की बुनियादी अवधारणाएं सीखनी शुरू कर दीं। उसने कंप्यूटर को दिए जाने वाले निर्देशों को समझा और छोटे-छोटे प्रोग्राम बनाने की कोशिश की। लगातार अभ्यास के साथ उसकी समझ बेहतर होती गई। धीरे-धीरे वह ऐसी चीजें बनाने लगा, जिनमें सामान्य तौर पर बच्चों की तुलना में ज्यादा तकनीकी समझ की जरूरत होती है।
उसकी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि गणित से डर के बावजूद उसने लॉजिक और प्रॉब्लम सॉल्विंग कोडिंग के जरिए समझना शुरू किया। प्रोग्रामिंग में भी गणितीय सोच और लॉजिकल रीजनिंग की जरूरत होती है, लेकिन जब बच्चा इन्हें कंप्यूटर प्रोजेक्ट के जरिए सीखता है तो प्रक्रिया उसके लिए ज्यादा रोचक हो सकती है।
कम उम्र में प्रोग्रामिंग सीखने की वजह से बच्चे की कहानी माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी दिलचस्प बन गई है। विशेषज्ञ आम तौर पर मानते हैं कि बच्चों को तकनीक सीखने का मौका देते समय उनकी उम्र और रुचि के अनुसार गतिविधियां चुनना जरूरी है। कोडिंग को केवल करियर की तैयारी के बजाय रचनात्मक समस्या-समाधान के माध्यम के रूप में भी देखा जा सकता है।
हालांकि, बच्चे को 'सबसे कम उम्र का प्रोग्रामर' कहे जाने के दावे की पुष्टि किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर जरूरी है। सोशल मीडिया पर वायरल कहानियों में उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर भी पेश किया जा सकता है। इसलिए बच्चे की उम्र, उपलब्धि और रिकॉर्ड से जुड़े दावों को आधिकारिक स्रोत से सत्यापित करना उचित होगा।
फिलहाल इस बच्चे की कहानी यह जरूर दिखाती है कि किसी विषय में कमजोरी या डर हमेशा व्यक्ति की क्षमता तय नहीं करता। सही रुचि, अभ्यास और मार्गदर्शन मिलने पर वही बच्चा किसी दूसरे क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा सकता है। मैथ्स से दूरी बनाने वाले इस बच्चे का प्रोग्रामिंग की ओर बढ़ना इसी बदलाव की दिलचस्प मिसाल के तौर पर चर्चा में है।