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20 साल की पालतू बकरी ‘कटोरी’ की मौत पर किसान ने किया अंतिम संस्कार, 600 लोगों को कराया तेरहवीं का भोज

 

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से इंसान और जानवर के बीच गहरे रिश्ते की भावुक मिसाल सामने आई है। यहां एक किसान ने अपनी करीब 20 साल पुरानी पालतू बकरी ‘कटोरी’ के निधन के बाद उसका अंतिम संस्कार पूरे रीति-रिवाज के साथ किया। इतना ही नहीं, किसान ने बकरी की याद में करीब 600 लोगों को तेरहवीं का भोज भी कराया। यह घटना अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

20 साल तक परिवार का हिस्सा रही कटोरी

जानकारी के मुताबिक, किसान के परिवार में ‘कटोरी’ करीब दो दशक से थी। इतने लंबे समय तक घर में रहने के कारण वह सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं रही, बल्कि परिवार के सदस्य जैसी बन गई थी।

परिवार के लोग उसकी देखभाल करते थे और उसके साथ भावनात्मक रूप से जुड़े हुए थे। उम्र बढ़ने के साथ कटोरी कमजोर होने लगी और आखिरकार उसका निधन हो गया। बकरी की मौत से परिवार में शोक का माहौल छा गया।

इंसानों की तरह किया अंतिम संस्कार

कटोरी की मौत के बाद किसान ने उसके अंतिम संस्कार को लेकर फैसला किया कि उसे सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह विदाई दी जाएगी। इसके बाद बकरी के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।

किसान और परिवार के सदस्यों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उसकी अंतिम विदाई की। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।

600 लोगों को कराया तेरहवीं का भोज

कटोरी की याद में किसान ने तेरहवीं के अवसर पर करीब 600 लोगों के लिए भोज का आयोजन किया। गांव और आसपास के लोगों को इसमें आमंत्रित किया गया।

इतने बड़े स्तर पर पालतू बकरी की तेरहवीं का आयोजन देखकर लोग भी हैरान रह गए। हालांकि, परिवार के लिए यह केवल कोई रस्म नहीं थी, बल्कि उस जीव को सम्मान देने का तरीका था, जिसने करीब 20 साल उनके घर में बिताए थे।

ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना मामला

घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसकी काफी चर्चा हो रही है। कुछ लोगों ने इसे किसान का अपनी पालतू बकरी के प्रति असाधारण प्रेम और लगाव बताया।

वहीं कई लोगों का कहना है कि ग्रामीण परिवारों में पालतू पशु अक्सर घर के सदस्यों की तरह ही होते हैं। वे वर्षों तक परिवार के साथ रहते हैं और उनकी देखभाल करने वालों के साथ गहरा भावनात्मक रिश्ता बन जाता है।

जानवरों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव की मिसाल

पालतू जानवरों और इंसानों के बीच भावनात्मक रिश्ता कोई नई बात नहीं है। कुत्ते, बिल्ली, गाय, बकरी और दूसरे पशु लंबे समय तक परिवार के साथ रहने पर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन जाते हैं।

कटोरी के मामले में भी यही रिश्ता दिखाई दिया। 20 साल का साथ किसी भी परिवार के लिए लंबा समय होता है। इसलिए उसकी मौत के बाद किसान ने जिस तरह अंतिम संस्कार और तेरहवीं की रस्म निभाई, वह उसके गहरे लगाव को दर्शाता है।

कटोरी को परिवार के सदस्य की तरह दी विदाई

विदिशा की यह घटना बताती है कि इंसान और पशु के बीच बना रिश्ता कई बार खून के रिश्तों से भी कम नहीं होता। कटोरी ने करीब दो दशक तक अपने मालिक के परिवार के साथ जिंदगी बिताई और आखिर में उसे भी परिवार के सदस्य की तरह विदाई मिली।