KYC के लिए हाथ से खोलनी पड़ी आंखें, AI नहीं पहचान पाया चेहरा; वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल
डिजिटल KYC प्रक्रिया के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने तकनीक और उसकी सीमाओं पर बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में देखा जा सकता है कि KYC के लिए एक व्यक्ति की आंखों को स्कैन करने में परेशानी आ रही है, जिसके बाद उसकी पलकें हाथ से उठाकर आंखों को स्कैन कराने की कोशिश की गई।
बताया जा रहा है कि यह मामला नागालैंड का है। यहां एक व्यक्ति की आंखों की बनावट के कारण AI आधारित फेस और आईरिस स्कैनिंग सिस्टम उसे पहचान नहीं पा रहा था। KYC प्रक्रिया पूरी करने के लिए वहां मौजूद लोगों को उसकी आंखें खुली रखने में मदद करनी पड़ी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
वीडियो में दिखाई देता है कि KYC के दौरान कैमरा व्यक्ति के चेहरे और आंखों को स्कैन करने की कोशिश करता है, लेकिन बार-बार प्रक्रिया फेल हो जाती है। इसके बाद आसपास मौजूद लोग उसकी पलकें उठाकर आंखों को कैमरे के सामने रखने की कोशिश करते हैं, ताकि मशीन उसकी पहचान कर सके।
AI आधारित KYC में आ रही चुनौतियां
डिजिटल KYC में आजकल फेस रिकग्निशन, लाइव फोटो और आंखों की गतिविधियों के जरिए व्यक्ति की पहचान की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सामने मौजूद व्यक्ति वास्तविक है और किसी तरह की धोखाधड़ी नहीं हो रही है।
हालांकि, कई बार आंखों की बनावट, शारीरिक स्थिति या किसी बीमारी के कारण लोगों को ऐसी प्रक्रियाओं में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कुछ लोग आंखें झपकाने या लाइव फोटो की शर्त पूरी नहीं कर पाने के कारण डिजिटल KYC पूरी नहीं कर पाए।
एक्सपर्ट बोले- तकनीक को और समावेशी बनाने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल पहचान प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ-साथ उसे हर व्यक्ति के लिए आसान और सुविधाजनक बनाना भी जरूरी है। जिन लोगों को आंखों, चेहरे या अन्य शारीरिक कारणों से परेशानी होती है, उनके लिए वैकल्पिक वेरिफिकेशन विकल्प उपलब्ध होने चाहिए।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AI आधारित पहचान प्रणाली में लगातार सुधार हो रहा है, लेकिन किसी भी तकनीक में मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे तकनीक की कमजोरी बताया, तो कुछ ने कहा कि मशीनों को इंसानी विविधताओं को बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ तकनीक को अधिक आसान, सुरक्षित और सभी लोगों के लिए सुलभ बनाने की जरूरत है।