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170 किमी सफर के बाद भी चमचमाता रहा ट्रेन का टॉयलेट! मदुरै-रामेश्वरम पैसेंजर का VIDEO वायरल, छिड़ी नई बहस

 

सोशल मीडिया पर इन दिनों तमिलनाडु की मदुरै-रामेश्वरम पैसेंजर ट्रेन का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में ट्रेन की साफ-सफाई देखकर लोग हैरान रह गए। दावा किया जा रहा है कि करीब 170 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद भी ट्रेन का टॉयलेट और फर्श बिल्कुल साफ और चमकदार नजर आया।

वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने के बाद लोग ट्रेन की स्वच्छता की जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं, इसने देश में सिविक सेंस (नागरिक जिम्मेदारी) को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।

वीडियो में दिखी साफ-सुथरी ट्रेन

वायरल वीडियो में ट्रेन के कोच, फर्श और टॉयलेट काफी साफ दिखाई देते हैं। दावा किया जा रहा है कि लंबी दूरी तय करने के बावजूद कहीं भी गंदगी या कचरा नजर नहीं आया। टॉयलेट भी साफ-सुथरा और व्यवस्थित दिखाई देता है, जिसे देखकर सोशल मीडिया यूजर्स हैरान हैं।

कई लोगों का कहना है कि आमतौर पर पैसेंजर ट्रेनों में ऐसी साफ-सफाई कम देखने को मिलती है, इसलिए यह वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है।

सिविक सेंस पर छिड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने इसे दक्षिण भारत के लोगों की नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए उनकी सराहना की। वहीं, कई यूजर्स ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की तुलना करने के बजाय स्वच्छता बनाए रखना पूरे देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

कुछ लोगों ने यह भी लिखा कि ट्रेनों की सफाई केवल रेलवे कर्मचारियों की मेहनत से नहीं, बल्कि यात्रियों के सहयोग से भी संभव होती है।

रेलवे की सफाई व्यवस्था की भी हुई तारीफ

कई यूजर्स ने भारतीय रेलवे और सफाई कर्मचारियों की मेहनत की भी सराहना की। उनका कहना है कि यदि यात्री भी जिम्मेदारी निभाएं, तो ट्रेनें लंबे सफर के बाद भी साफ रह सकती हैं।

हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि किसी एक वायरल वीडियो के आधार पर पूरे क्षेत्र या देश के अलग-अलग हिस्सों की तुलना करना उचित नहीं होगा।

वीडियो बना चर्चा का विषय

मदुरै-रामेश्वरम पैसेंजर ट्रेन का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। लोग इसे स्वच्छता और अनुशासन का अच्छा उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे नागरिक जिम्मेदारी पर सकारात्मक चर्चा की शुरुआत मान रहे हैं।

हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही, केवल एक वीडियो के आधार पर उत्तर और दक्षिण भारत के लोगों के सिविक सेंस को लेकर व्यापक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।