इन्फ्लुएंसर बनने का सपना या सिर्फ वायरल होने की दौड़? जानिए क्यों हो रही चर्चा, वीडियो वायरल
आज के दौर में सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर बनना लाखों युवाओं का सपना है। Instagram पर रील्स बनाना, ब्रांड प्रमोशन करना और लाखों फॉलोअर्स जुटाना कई लोगों के लिए करियर का रास्ता बन चुका है। लेकिन क्या सोशल मीडिया पर ज्यादा फॉलोअर्स होने का मतलब वास्तव में एक अच्छा कंटेंट क्रिएटर होना है?इसी सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें रील्स बनाने वाले कुछ क्रिएटर्स के काम करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं।
यह वीडियो सोनपुर थिएटर का नहीं है !
— Ranjan Singh (@RanjanSinghh_) October 24, 2026
ये सभी Social Media Contant क्रिएटर लड़कियाँ हैं- जो खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बोलती हैं।
क्या लोगों को इन्फ्लुएंस करती हैं, खुद को ही नहीं पता।
लड़की होने का सिर्फ एडवांटेज मिलता है ,,
घटिया से घटिया मेकअप प्रोडक्ट का फ्री में प्रचार… pic.twitter.com/0joGLpW5E7
यह वीडियो सोनपुर थिएटर का नहीं है !
— Ranjan Singh (@RanjanSinghh_) October 24, 2026
ये सभी Social Media Contant क्रिएटर लड़कियाँ हैं- जो खुद को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बोलती हैं।
क्या लोगों को इन्फ्लुएंस करती हैं, खुद को ही नहीं पता।
लड़की होने का सिर्फ एडवांटेज मिलता है ,,
घटिया से घटिया मेकअप प्रोडक्ट का फ्री में प्रचार… pic.twitter.com/0joGLpW5E7
पोस्ट में दावा किया गया है कि कुछ इन्फ्लुएंसर्स को मेकअप प्रोडक्ट्स और कपड़े प्रमोशन के बदले मुफ्त में मिलते हैं, जबकि कुछ को भोजपुरी गानों पर रील्स बनाने के लिए मामूली भुगतान किया जाता है। पोस्ट लिखने वाले का आरोप है कि कई लोग कंटेंट क्रिएशन के नाम पर केवल डांस वीडियो बनाने तक सीमित रह जाते हैं।
इस पोस्ट में Instagram और YouTube के फॉलोअर्स के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाया गया है। तर्क दिया गया है कि किसी क्रिएटर के Instagram पर लाखों फॉलोअर्स हो सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वही दर्शक उसके YouTube चैनल को भी सब्सक्राइब करें या उसके दूसरे कंटेंट में दिलचस्पी लें।
हालांकि, इन दावों को सभी महिला क्रिएटर्स पर लागू करना सही नहीं होगा। सोशल मीडिया पर कई महिलाएं और पुरुष डांस, कॉमेडी, शिक्षा, तकनीक, फैशन और दूसरे क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर रहे हैं। डांस वीडियो बनाना भी अपने आप में कंटेंट क्रिएशन का एक रूप है।असल सवाल यह है कि क्या किसी क्रिएटर की सफलता सिर्फ फॉलोअर्स और व्यूज से तय होनी चाहिए, या उसके कंटेंट की गुणवत्ता, मेहनत और दर्शकों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी महत्व मिलना चाहिए?