'कोई नया लोन मत लीजिए, 3 साल का पैसा बचाकर रखिए', दिग्गज इन्वेस्टमेंट एडवाइजर ने दी मुश्किल समय की चेतावनी
आर्थिक अनिश्चितता के दौर में नौकरी, कारोबार और निवेश को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। ऐसे समय में वित्तीय विशेषज्ञ अक्सर लोगों को अपनी बचत मजबूत रखने और गैरजरूरी कर्ज से बचने की सलाह देते हैं। अब एक दिग्गज इन्वेस्टमेंट एडवाइजर की सलाह चर्चा में है। उन्होंने लोगों को मुश्किल समय के लिए तैयार रहने और कम से कम तीन साल के खर्च के बराबर पैसा सुरक्षित रखने की बात कही है।
नया लोन लेने से बचने की सलाह
इन्वेस्टमेंट एडवाइजर ने लोगों को सलाह दी है कि अगर बहुत जरूरी न हो तो नया लोन लेने से बचना चाहिए। खासकर ऐसे समय में जब आमदनी को लेकर अनिश्चितता हो, उस वक्त कर्ज का बोझ आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।
होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन जैसी लंबी अवधि की देनदारियों को लेने से पहले अपनी आय, नौकरी की स्थिरता और मौजूदा कर्ज का आकलन करना जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सिर्फ इसलिए कर्ज लेना सही फैसला नहीं है क्योंकि बैंक या वित्तीय संस्थान लोन देने के लिए तैयार हैं।
तीन साल का पैसा बचाकर रखने की बात
सलाह का सबसे अहम हिस्सा तीन साल के खर्च के बराबर रकम बचाकर रखने को लेकर है। आम तौर पर वित्तीय विशेषज्ञ इमरजेंसी फंड बनाने की बात करते हैं, लेकिन तीन साल की जरूरतों के बराबर रकम रखने की सलाह इससे कहीं ज्यादा बड़ी सुरक्षा का संकेत देती है।
इस तरह की बचत का उद्देश्य किसी मुश्किल परिस्थिति में निवेश को जल्दबाजी में बेचने या भारी कर्ज लेने से बचना हो सकता है। अगर नौकरी चली जाए, कारोबार में मंदी आ जाए या परिवार पर अचानक बड़ा खर्च आ जाए, तो पर्याप्त नकदी आर्थिक दबाव को कम कर सकती है।
सिर्फ पैसा बचाना ही काफी नहीं
हालांकि बड़ी रकम को लंबे समय तक सिर्फ बचत खाते में रखना भी हर व्यक्ति के लिए सही रणनीति नहीं हो सकती। महंगाई के कारण समय के साथ पैसे की वास्तविक खरीद क्षमता कम हो सकती है। इसलिए इमरजेंसी फंड और लंबी अवधि के निवेश को अलग-अलग देखना जरूरी है।
जरूरी खर्चों के लिए आसानी से उपलब्ध रकम रखी जा सकती है, जबकि लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए व्यक्ति अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार निवेश का विकल्प चुन सकता है।
कर्ज और खर्च का रखें हिसाब
मुश्किल आर्थिक दौर की तैयारी के लिए सबसे पहले अपने मासिक खर्चों का हिसाब लगाना जरूरी है। किराया या होम लोन की EMI, बच्चों की फीस, बिजली-पानी, राशन, बीमा और अन्य जरूरी खर्चों को अलग करने के बाद यह पता लगाया जा सकता है कि परिवार को हर महीने न्यूनतम कितनी रकम की जरूरत है।
इसके बाद उसी आधार पर इमरजेंसी फंड तैयार किया जा सकता है। साथ ही क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे महंगे कर्ज को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी है।
विशेषज्ञ की सलाह का मकसद क्या है?
दिग्गज इन्वेस्टमेंट एडवाइजर की यह सलाह मूल रूप से लोगों को आर्थिक झटकों के लिए तैयार रहने की ओर इशारा करती है। बाजार में उतार-चढ़ाव, नौकरी में बदलाव या आय में कमी जैसी परिस्थितियों का सामना करने के लिए मजबूत वित्तीय आधार मददगार हो सकता है।
हालांकि तीन साल के खर्च की बचत हर व्यक्ति के लिए संभव या जरूरी हो, ऐसा नहीं है। यह व्यक्ति की आय, परिवार की जिम्मेदारियों, कर्ज और जोखिम क्षमता पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी निवेश या लोन संबंधी फैसले से पहले अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति का आकलन करना बेहतर है।
मुश्किल समय की तैयारी का सबसे बड़ा मंत्र यही है कि कमाई के साथ बचत, खर्च और कर्ज का संतुलन भी मजबूत रखा जाए। अचानक आने वाली परिस्थितियों में यही वित्तीय अनुशासन सबसे बड़ी सुरक्षा बन सकता है।