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'जिन्हें नौकरी की सख्त जरूरत हो, उन्हें काम पर मत रखो'; मारवाड़ी एंटरप्रेन्योर ने समझाया इसका लॉजिक

 

बिजनेस की दुनिया में कर्मचारियों की भर्ती को लेकर अक्सर कहा जाता है कि ऐसे लोगों को नौकरी देनी चाहिए, जिन्हें काम की सबसे ज्यादा जरूरत हो। लेकिन एक मारवाड़ी एंटरप्रेन्योर की अलग सोच ने इस चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। उनका कहना है कि जिन लोगों को नौकरी की सख्त जरूरत होती है, उन्हें काम पर रखने से पहले कई पहलुओं पर विचार करना चाहिए। इस सोच के पीछे उन्होंने जो तर्क दिया है, वह सोशल मीडिया और बिजनेस जगत में चर्चा का विषय बन सकता है।

जरूरत और योग्यता के बीच अंतर समझना जरूरी

एंटरप्रेन्योर की इस सोच का मुख्य आधार यह है कि किसी व्यक्ति को नौकरी की जरूरत होना और किसी काम के लिए उसका सही उम्मीदवार होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी कर्मचारी की आर्थिक मजबूरी को उसकी योग्यता, अनुभव और काम के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी तरह, आर्थिक रूप से मजबूत व्यक्ति भी जरूरी नहीं कि बेहतर कर्मचारी साबित हो।

भर्ती के दौरान उम्मीदवार की क्षमताओं, सीखने की इच्छा, व्यवहार और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता को प्राथमिकता देना जरूरी है। केवल इस आधार पर किसी को नौकरी देना कि उसे पैसों की बहुत जरूरत है, लंबे समय में कारोबारी फैसले को प्रभावित कर सकता है।

क्या है इसके पीछे का लॉजिक?

इस विचार के पीछे एक तर्क यह हो सकता है कि आर्थिक दबाव में काम करने वाला कर्मचारी कभी-कभी अपनी वास्तविक रुचि और क्षमता के बजाय मजबूरी के कारण नौकरी स्वीकार करता है। ऐसी स्थिति में वेतन, काम के घंटे या कार्यस्थल की परिस्थितियों को लेकर असंतोष पैदा होने की आशंका रहती है। बेहतर अवसर मिलने पर वह नौकरी बदलने का फैसला भी कर सकता है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि आर्थिक जरूरतमंद लोग अच्छे कर्मचारी नहीं होते। कई लोग परिवार की जिम्मेदारियों के कारण अधिक मेहनत करते हैं और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते हैं। इसलिए केवल आर्थिक स्थिति को देखकर किसी उम्मीदवार के भविष्य के प्रदर्शन का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

भर्ती में किन बातों पर देना चाहिए ध्यान?

किसी भी कारोबारी संस्थान के लिए कर्मचारी चुनते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले उम्मीदवार के कौशल और काम से जुड़े अनुभव का आकलन करना चाहिए। इसके बाद यह देखना चाहिए कि वह कंपनी के कामकाज, टीम और जिम्मेदारियों के साथ कितना तालमेल बैठा सकता है।

इसके अलावा, उम्मीदवार की सीखने की क्षमता, ईमानदारी, संवाद करने का तरीका और लंबे समय तक काम करने की इच्छा को भी समझना जरूरी है। नौकरी की शर्तें, वेतन और जिम्मेदारियां स्पष्ट रखने से कर्मचारी और नियोक्ता के बीच गलतफहमी की आशंका कम होती है।

क्या आर्थिक जरूरत को नजरअंदाज करना सही है?

विशेषज्ञों के नजरिए से देखें तो भर्ती का फैसला किसी एक सिद्धांत के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उम्मीदवार की आर्थिक जरूरत को उसकी कमजोरी मानना भी गलत है और केवल उसकी मजबूरी देखकर नौकरी देना भी पर्याप्त नहीं है। सही तरीका यह है कि सभी उम्मीदवारों का मूल्यांकन समान मानकों पर किया जाए।

मारवाड़ी एंटरप्रेन्योर की इस बात को भर्ती प्रक्रिया में सावधानी बरतने की सलाह के रूप में देखा जा सकता है। इसका व्यापक संदेश यह है कि बिजनेस में भावनाओं के साथ व्यावहारिक सोच भी जरूरी है। किसी कर्मचारी को नौकरी देते समय उसकी जरूरत से अधिक उसकी योग्यता, काम के प्रति रवैया और जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता पर ध्यान देना चाहिए।