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क्या नवरात्रि के दौरान बढ़ जाती है कंडोम की मांग? गुजरात के गरबा को लेकर सोशल मीडिया पर बहस!

 

गुजरात में नवरात्रि का त्योहार आते ही गरबा की धूम देखने को मिलती है। रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़े, संगीत, डांस और देर रात तक चलने वाले कार्यक्रम इस उत्सव की खास पहचान हैं। लेकिन इस बार गरबा को लेकर सोशल मीडिया पर एक अलग ही चर्चा शुरू हो गई है।वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि नवरात्रि और गरबा उत्सव के दौरान कंडोम की बिक्री में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है। इस दावे के सामने आने के बाद त्योहार के दौरान युवाओं की जीवनशैली और बदलते सामाजिक व्यवहार को लेकर बहस छिड़ गई है।

गुजरात के गरबा ने एक नई बहस छेड़ दी है।

नवरात्रि एवं गरबा के समय में कंडोम की बिक्री में बढ़ोतरी बताई गई है जहां पर कंडोम की बिक्री 30% तक बढ़ गई है , इस खुशी से मनाए जाने वाले त्यौहार पर प्रश्न चिह्न लगने लगे है।

इसमें ज्यादातर संख्या में महिलाओं...view more pic.twitter.com/97Ix5XRH4G

— Pradeep Chaudhary (@pradeepgr63) October 14, 2026

गुजरात के गरबा ने एक नई बहस छेड़ दी है।

नवरात्रि एवं गरबा के समय में कंडोम की बिक्री में बढ़ोतरी बताई गई है जहां पर कंडोम की बिक्री 30% तक बढ़ गई है , इस खुशी से मनाए जाने वाले त्यौहार पर प्रश्न चिह्न लगने लगे है।

इसमें ज्यादातर संख्या में महिलाओं...view more pic.twitter.com/97Ix5XRH4G

— Pradeep Chaudhary (@pradeepgr63) October 14, 2026


हालांकि, इस आंकड़े के समर्थन में कोई स्पष्ट, विश्वसनीय स्रोत उपलब्ध न होने पर इसे पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता। यह जानना जरूरी है कि बिक्री में कथित बढ़ोतरी किन शहरों में हुई, किस अवधि की तुलना की गई और आंकड़े किस संस्था या विक्रेता ने जारी किए।नवरात्रि के दौरान गुजरात के कई शहरों में बड़े गरबा कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इनमें बड़ी संख्या में युवा हिस्सा लेते हैं और देर रात तक उत्सव का आनंद लेते हैं। ऐसे आयोजनों के दौरान बाजार में अलग-अलग उत्पादों की मांग में बदलाव हो सकता है, लेकिन केवल बिक्री के किसी दावे के आधार पर लोगों के व्यवहार या पूरे त्योहार के चरित्र पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

कंडोम की बिक्री में बढ़ोतरी, यदि विश्वसनीय आंकड़ों से साबित होती है, तो उसे सुरक्षित यौन व्यवहार और स्वास्थ्य जागरूकता के नजरिए से भी समझा जाना चाहिए। सुरक्षित यौन संबंधों के बारे में जानकारी रखना जिम्मेदार व्यवहार का हिस्सा है। किसी त्योहार में भाग लेने वाले लोगों के बारे में बिना प्रमाण के निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।