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क्या सच में रोते हैं पहाड़? काले रंग के इस रहस्यमयी द्रव को लोग कहते हैं पहाड़ों के आंसू, जानिए शिलाजीत का सच

 

भारत के पहाड़ी इलाकों में कई ऐसी प्राकृतिक घटनाएं देखने को मिलती हैं, जो लोगों को हैरान कर देती हैं। इन्हीं में से एक है पहाड़ों की चट्टानों से निकलने वाला गहरे काले रंग का चिपचिपा पदार्थ। कई लोग इसे "पहाड़ों का पसीना" या "पहाड़ों के आंसू" कहते हैं। देखने में यह घटना बेहद रहस्यमयी लगती है, लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण छिपा है।

दरअसल, पहाड़ों से निकलने वाला यह काला द्रव शिलाजीत (Shilajit) होता है। आयुर्वेद में इसे लंबे समय से एक प्राकृतिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह मुख्य रूप से हिमालय जैसे ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में पाया जाता है।

कैसे बनता है शिलाजीत?

वैज्ञानिकों के अनुसार, शिलाजीत का निर्माण हजारों सालों में होता है। पहाड़ों में मौजूद वनस्पतियों, पौधों और जैविक पदार्थों के धीरे-धीरे विघटन से एक खनिजयुक्त पदार्थ बनता है, जो चट्टानों की दरारों से बाहर निकलता है।

गर्मी बढ़ने पर चट्टानों के अंदर मौजूद यह पदार्थ पिघलकर धीरे-धीरे बाहर आने लगता है। इसी वजह से यह पहाड़ों की सतह पर बहता हुआ दिखाई देता है और लोगों को लगता है कि मानो पहाड़ रो रहे हों।

क्यों कहा जाता है पहाड़ों का आंसू?

जब पहाड़ों की ऊंची चट्टानों से काले या भूरे रंग का तरल पदार्थ बूंद-बूंद करके निकलता है, तो दूर से देखने पर यह बिल्कुल ऐसा लगता है जैसे पहाड़ से आंसू बह रहे हों। इसी वजह से स्थानीय लोग इसे भावनात्मक रूप से "पहाड़ों के आंसू" भी कहते हैं।

हालांकि, यह किसी भावना या जीवित प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम है।

आयुर्वेद में शिलाजीत का महत्व

शिलाजीत को आयुर्वेद में काफी महत्वपूर्ण माना गया है। पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका इस्तेमाल ऊर्जा बढ़ाने और शरीर की ताकत से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है।

इसमें कई खनिज और जैविक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सेवन करने से पहले इसकी शुद्धता और गुणवत्ता की जांच करना जरूरी है, क्योंकि बाजार में नकली शिलाजीत भी उपलब्ध हो सकता है।

हिमालय में क्यों मिलता है ज्यादा?

हिमालय क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और यहां मौजूद प्राचीन वनस्पतियां शिलाजीत बनने के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यही कारण है कि भारत, नेपाल और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।

प्रकृति का अनोखा रहस्य

पहाड़ों से निकलने वाला यह काला द्रव भले ही देखने में रहस्यमयी लगे, लेकिन यह प्रकृति की हजारों साल पुरानी प्रक्रिया का परिणाम है। जिसे लोग कभी पहाड़ों के आंसू समझते थे, वह वास्तव में धरती के अंदर होने वाले बदलावों से बना एक खास खनिज पदार्थ है।

यही वजह है कि शिलाजीत आज भी वैज्ञानिकों और आयुर्वेद विशेषज्ञों के लिए अध्ययन का विषय बना हुआ है।