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4 महीने नहीं मिली नौकरी, कॉरपोरेट कर्मचारी ने शुरू किया बर्तन धोने का काम, बोला- पैसे की जरूरत नहीं, बस...

 

नौकरी जाने के बाद नई नौकरी की तलाश करना आसान नहीं होता। खासकर कॉरपोरेट सेक्टर में लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कई लोगों को महीनों तक अवसर का इंतजार करना पड़ता है। इसी बीच एक कॉरपोरेट कर्मचारी की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसने चार महीने तक नौकरी नहीं मिलने के बाद बर्तन धोने का काम शुरू कर दिया।

शख्स ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि उसे फिलहाल पैसों से ज्यादा काम करते रहने की जरूरत महसूस हो रही थी। उसका यह फैसला सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

चार महीने तक तलाशता रहा नौकरी

शख्स के मुताबिक, कॉरपोरेट नौकरी छूटने के बाद उसने लगातार नई नौकरी की तलाश की। उसने कई जगह आवेदन किए, इंटरव्यू दिए, लेकिन चार महीने बीत जाने के बावजूद उसे कोई उपयुक्त अवसर नहीं मिला।

लंबे समय तक खाली बैठने के बजाय उसने कुछ अलग करने का फैसला किया। उसने बर्तन धोने का काम शुरू कर दिया। उसका कहना था कि कोई भी ईमानदार काम छोटा नहीं होता और खाली बैठने से बेहतर है कि व्यक्ति कुछ न कुछ काम करता रहे।

‘पैसे की जरूरत नहीं, बस काम चाहिए’

अपनी कहानी बताते हुए शख्स ने कहा कि फिलहाल उसका मकसद ज्यादा पैसे कमाना नहीं है। उसे बस काम करते रहने की जरूरत है। उसके मुताबिक काम करने से दिनचर्या बनी रहती है और व्यक्ति मानसिक रूप से भी सक्रिय रहता है।

उसके इस विचार ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा। कई लोगों ने कहा कि नौकरी का पद या काम की प्रकृति चाहे जो हो, मेहनत से काम करने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए।

लोगों ने की हिम्मत की तारीफ

शख्स की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उसकी सोच और आत्मसम्मान की तारीफ की। कई यूजर्स ने कहा कि आज के दौर में लोग काम को उसकी प्रतिष्ठा और सैलरी से जोड़कर देखते हैं, जबकि असल में ईमानदारी से किया गया हर काम सम्मान के योग्य है।

कुछ लोगों ने इसे बेरोजगारी के दौर में सकारात्मक सोच का उदाहरण बताया। वहीं, कई यूजर्स ने यह भी कहा कि कॉरपोरेट नौकरी की तलाश जारी रखते हुए कोई दूसरा काम करना आर्थिक और मानसिक दोनों लिहाज से बेहतर विकल्प हो सकता है।

काम छोटा-बड़ा नहीं होता

इस कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि रोजगार का इंतजार करते हुए व्यक्ति को काम से दूरी नहीं बनानी चाहिए। कोई भी काम छोटा नहीं होता, बशर्ते वह ईमानदारी से किया जाए।

चार महीने तक नौकरी नहीं मिलने के बाद बर्तन धोने का काम शुरू करने वाले इस कॉरपोरेट कर्मचारी की कहानी ने इसी सोच को सामने रखा है। उसका कहना है कि पैसों से ज्यादा जरूरी है कि इंसान काम करता रहे और खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहे।