देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता का गरबा पर बयान, हिंदू संगठनों की मांग से छिड़ी बहस! देखें वायरल वीडियो
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के गरबा और नवरात्रि को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। उन्होंने कहा कि त्योहार सभी के लिए हैं और अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति शांतिपूर्वक गरबा में शामिल होकर उत्सव का आनंद लेता है, तो उन्हें इसमें कुछ गलत नहीं लगता।
ये है महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस की बीबी अमृता फडणवीस
— Pappu Kr Paswan (@Pappu_kumavya) October 22, 2026
पति रोमांटिक न होने के कारण फैज़ल के साथ दोस्ती की है, नौरात्रि में जमकर गरबा खेले हैं रात में,
अब एक बजरंग दल के युवक ने इसका विरोध किया तो अपने पति से कहकर FIR करा दी।
आदमी को समझना चाहिए देश में बाबा साहेब का संविधान… pic.twitter.com/oOpnPDoYFa
ये है महाराष्ट्र सीएम देवेंद्र फडणवीस की बीबी अमृता फडणवीस
— Pappu Kr Paswan (@Pappu_kumavya) October 22, 2026
पति रोमांटिक न होने के कारण फैज़ल के साथ दोस्ती की है, नौरात्रि में जमकर गरबा खेले हैं रात में,
अब एक बजरंग दल के युवक ने इसका विरोध किया तो अपने पति से कहकर FIR करा दी।
आदमी को समझना चाहिए देश में बाबा साहेब का संविधान… pic.twitter.com/oOpnPDoYFa
यह बयान उस समय आया, जब विश्व हिंदू परिषद की ओर से महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिम समुदाय की एंट्री सीमित करने की मांग की गई थी। महाराष्ट्र के मंत्री नीतेश राणे ने भी इस मांग का समर्थन किया था।
संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता पर बहस
इस विवाद के बीच सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी हो रही है कि क्या किसी व्यक्ति को दूसरे समुदाय के लोगों के साथ गरबा या डांडिया खेलने से रोका जाना चाहिए। भारत का संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों की गारंटी देता है, हालांकि सार्वजनिक आयोजनों में लागू वैध नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
अमृता फडणवीस ने त्योहारों को समावेशी बताते हुए कहा कि किसी भी समुदाय के लोग शांतिपूर्वक कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहें, तो उन्हें केवल धर्म के आधार पर बाहर नहीं किया जाना चाहिए।
फैसल और FIR से जुड़े दावों की पुष्टि नहीं
सोशल मीडिया पर वायरल संदेश में फैसल के साथ अमृता फडणवीस के गरबा खेलने और एक युवक के खिलाफ उनके पति के जरिए FIR दर्ज करवाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय समाचार रिपोर्टों में इन आरोपों की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इन दावों को सच मानकर साझा करना उचित नहीं होगा।