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‘सुबह 9 बजे कोर्ट आओ’…Gen Z इंटर्न का जवाब सुनकर चकराया वकील का माथा! वायरल पोस्ट पर छिड़ी बहस
 

 

काम की दुनिया में Gen Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं के काम करने और अपनी सीमाएं तय करने के तरीके को लेकर अक्सर बहस होती रहती है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वकील और उसके Gen Z इंटर्न से जुड़ी पोस्ट वायरल हो रही है। पोस्ट में दावा किया गया कि वकील ने अपने इंटर्न को सुबह 9 बजे कोर्ट पहुंचने के लिए कहा, लेकिन इंटर्न के जवाब ने वकील को हैरान कर दिया।

इंटर्न ने कथित तौर पर ऐसा जवाब दिया, जिसे सुनकर वकील को समझ नहीं आया कि इसे नई पीढ़ी का आत्मविश्वास माना जाए या काम के प्रति अलग नजरिया।

वकील ने भेजा कोर्ट आने का मैसेज

वायरल पोस्ट के मुताबिक, वकील ने अपने इंटर्न को मैसेज भेजकर अगले दिन सुबह 9 बजे कोर्ट आने के लिए कहा। वकील को उम्मीद थी कि इंटर्न सामान्य तरीके से समय पर पहुंच जाएगा।

लेकिन जवाब में इंटर्न ने कथित तौर पर अपनी उपलब्धता और काम के समय को लेकर सवाल खड़ा कर दिया। उसने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि क्या सुबह 9 बजे कोर्ट पहुंचना उसके लिए अनिवार्य है।

यही जवाब सोशल मीडिया पर चर्चा का कारण बन गया।

Gen Z के काम करने का अलग अंदाज

Gen Z के युवा अक्सर वर्क-लाइफ बैलेंस, काम के घंटे और व्यक्तिगत सीमाओं को लेकर ज्यादा मुखर दिखाई देते हैं। वे कई बार बिना झिझक यह पूछ लेते हैं कि किसी काम की जरूरत क्यों है, उसका समय क्या होगा और उसकी प्राथमिकता कितनी है।

पुरानी पीढ़ी के कर्मचारियों के लिए जहां बॉस का निर्देश सीधे पालन करने वाली बात होती थी, वहीं नई पीढ़ी कई बार बातचीत और स्पष्टता को ज्यादा महत्व देती है।

यही अंतर इस वायरल पोस्ट में भी दिखाई देता है।

सोशल मीडिया पर दो गुटों में बंटे लोग

पोस्ट वायरल होने के बाद यूजर्स की राय भी बंट गई। एक वर्ग ने इंटर्न के जवाब का समर्थन किया। इन लोगों का कहना है कि काम करने वाले व्यक्ति को अपने समय और जिम्मेदारियों को लेकर सवाल पूछने का अधिकार होना चाहिए।

वहीं दूसरे वर्ग ने इंटर्न के रवैये को गैर-पेशेवर बताया। उनका कहना है कि इंटर्नशिप सीखने और अनुभव हासिल करने का मौका होती है, इसलिए वरिष्ठ के निर्देशों का सम्मान करना भी पेशेवर व्यवहार का हिस्सा है।

क्या अपनी सीमा तय करना गलत है?

इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि आखिर कार्यस्थल पर कर्मचारी और वरिष्ठ के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

अपनी सीमाओं के बारे में बात करना गलत नहीं है। लेकिन यह भी जरूरी है कि बातचीत का तरीका सम्मानजनक और पेशेवर हो। खासकर कानूनी पेशे जैसे क्षेत्र में समय की पाबंदी और अदालत की कार्यवाही की प्रकृति को समझना बेहद जरूरी हो सकता है।

दूसरी ओर, वरिष्ठों के लिए भी यह समझना जरूरी है कि नई पीढ़ी काम के साथ अपने व्यक्तिगत समय को भी महत्व देती है।

वायरल पोस्ट की पूरी सच्चाई?

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऐसी पोस्ट को लेकर यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर वायरल किस्सा पूरी तरह सत्यापित हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार व्यक्तिगत अनुभव या स्क्रीनशॉट के आधार पर बनी पोस्ट बिना पूरे संदर्भ के वायरल हो जाती है।

इसलिए इस मामले में भी पोस्ट को लेकर सामने आए दावों को उसी संदर्भ में देखना चाहिए।

बदल रही है ऑफिस की संस्कृति

Gen Z इंटर्न और वकील की यह कथित बातचीत भले ही छोटी हो, लेकिन इसने काम, अनुशासन और व्यक्तिगत आजादी को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।

एक तरफ अनुभव और पेशेवर अनुशासन है, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी का अपने समय और अधिकारों को लेकर स्पष्ट नजरिया।