कॉकरोच बनेंगे रेस्क्यू वर्कर, मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचाएंगे दवा; वैज्ञानिकों ने बनाया ‘साइबोर्ग पैरामेडिक’
आमतौर पर घरों में गंदगी से जुड़े माने जाने वाले कॉकरोच अब इंसानों की जान बचाने में मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने ऐसे साइबोर्ग कॉकरोच (Cyborg Cockroaches) विकसित किए हैं, जो भविष्य में भूकंप, इमारत गिरने या अन्य आपदाओं में मलबे के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचकर दवा पहुंचाने का काम कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने इन कॉकरोचों को खास इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कैमरा और छोटे मेडिकल इंजेक्शन सिस्टम से लैस किया है। इन्हें ‘पैराबॉर्ग (Paraborg)’ नाम दिया गया है। इनका उद्देश्य इंसानी रेस्क्यू टीम की जगह लेना नहीं, बल्कि उन जगहों तक पहुंचना है जहां पहुंचना इंसानों के लिए बेहद मुश्किल या खतरनाक होता है।
मलबे में पहुंचकर खोजेंगे पीड़ितों को
आपदा के समय कई बार लोग गिरी हुई इमारतों के नीचे या संकरी जगहों में फंस जाते हैं। ऐसी जगहों पर बड़े रोबोट या बचावकर्मी आसानी से नहीं पहुंच पाते। कॉकरोच अपने छोटे आकार और तेज गति के कारण इन तंग जगहों में आसानी से घुस सकते हैं।
वैज्ञानिकों ने इनके शरीर पर छोटे बैग जैसे उपकरण लगाए हैं, जिनमें कैमरा और दवा पहुंचाने वाला सिस्टम मौजूद है। रिमोट कंट्रोल की मदद से इन्हें दिशा दी जा सकती है।
जरूरतमंद तक पहुंचाएंगे जीवनरक्षक दवा
इन साइबोर्ग कॉकरोचों की सबसे खास बात यह है कि ये सिर्फ फंसे हुए लोगों को खोजने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें शुरुआती मेडिकल मदद भी दे सकेंगे।
इनमें लगे छोटे इंजेक्शन सिस्टम की मदद से आपात स्थिति में दवा पहुंचाने का परीक्षण किया गया है। शोध में करीब 15 सेंटीमीटर तक की दूरी से दवा पहुंचाने में 95 फीसदी तक सफलता दर्ज की गई।
इंसान के निर्देश पर करेंगे काम
वैज्ञानिकों ने कॉकरोच के शरीर में इलेक्ट्रोड लगाए हैं, जिनकी मदद से उनके मूवमेंट को नियंत्रित किया जाता है। ऑपरेटर इन संकेतों के जरिए उन्हें आगे बढ़ने, दिशा बदलने और तय स्थान तक पहुंचने के निर्देश दे सकते हैं।
इसके अलावा कैमरे की मदद से बचाव दल दूर बैठकर यह देख सकते हैं कि कॉकरोच कहां पहुंचा है और वहां क्या स्थिति है।
भविष्य में आपदा राहत में हो सकता है इस्तेमाल
शोधकर्ताओं का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे साइबोर्ग कीट आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। भूकंप, भूस्खलन, खदान हादसों या गिरी हुई इमारतों में ये छोटे रेस्क्यू वर्कर साबित हो सकते हैं।
हालांकि, यह तकनीक अभी शुरुआती शोध और परीक्षण के दौर में है। वैज्ञानिकों को वास्तविक परिस्थितियों में इसकी क्षमता और सुरक्षा को लेकर आगे और परीक्षण करने होंगे।
अगर यह तकनीक सफल होती है तो भविष्य में छोटे-छोटे कॉकरोच बड़े बचाव अभियानों का हिस्सा बन सकते हैं और मुश्किल हालात में इंसानों की जान बचाने में मदद कर सकते हैं।