झोपड़ी में चल रही बच्चों की पढ़ाई, न बेंच-डेस्क न टॉयलेट, Bihar School का VIDEO वायरल
बिहार में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने और उन्हें मॉडल स्कूल में बदलने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। बच्चों को आधुनिक सुविधाएं देने और स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने की बातें भी लगातार सामने आती हैं। लेकिन समस्तीपुर शहर के बीचों-बीच मौजूद एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की तस्वीरें इन दावों से बिल्कुल अलग कहानी बयां करती नजर आती हैं।
बिहार: न बेंच, न डेस्क, न शौचालय… झोपड़ी में पढ़ रहे बस्ती के बच्चे, सांप निकलने से दहशत
— AajTak (@aajtak) September 1, 2026
बिहार में सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने, उन्हें मॉडल स्कूल का रूप देने और बच्चों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं. लेकिन समस्तीपुर शहर के बीचोंबीच एक सरकारी प्राथमिक… pic.twitter.com/OUvBQSRGEz
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यहां पढ़ने वाले बच्चों के पास न ठीक से बैठने के लिए बेंच है, न डेस्क और न ही दूसरी जरूरी सुविधाएं। बच्चों को किसी पक्के और व्यवस्थित क्लासरूम में बैठाने के बजाय जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। स्कूल का कमरा भी किसी झोपड़ीनुमा ढांचे जैसा नजर आता है।
जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर मासूम
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पढ़ाई का माहौल कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें जमीन पर बैठकर ही पढ़ाई करनी पड़ती है। क्लासरूम में पर्याप्त फर्नीचर तक उपलब्ध नहीं है।
ब्लैकबोर्ड की स्थिति भी बेहतर नहीं बताई जा रही है। ऐसे में बच्चों के लिए पढ़ाई करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
गर्मी में कॉपी-किताब से करते हैं हवा
गर्मी के दिनों में बच्चों की परेशानी और बढ़ जाती है। जब पंखा काम नहीं करता तो छोटे-छोटे बच्चे अपनी कॉपी और किताबों से खुद को हवा करते हुए नजर आते हैं।
जिस उम्र में बच्चों को बेहतर माहौल और सुविधाओं के बीच शिक्षा मिलनी चाहिए, उसी उम्र में उन्हें गर्मी और असुविधा के बीच पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बारिश आते ही पढ़ाई पर लग जाता है ब्रेक
समस्या सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं है। बारिश के मौसम में भी बच्चों के सामने मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। बताया जा रहा है कि बारिश होने पर छत से पानी टपकने लगता है, जिसके कारण क्लास चलाना तक मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और उन्हें बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ता है।
टॉयलेट तक की सुविधा नहीं
स्कूल की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक टॉयलेट की सुविधा का अभाव भी है। बच्चों के लिए बुनियादी स्वच्छता और शौचालय जैसी जरूरी सुविधा तक उपलब्ध नहीं होने के सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसके अलावा स्कूल के आसपास के माहौल और जर्जर ढांचे के कारण बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
सांप निकलने का भी डर
बताया जा रहा है कि झोपड़ीनुमा और असुरक्षित परिसर में बच्चों को सांप जैसे जहरीले जीवों का डर भी बना रहता है। ऐसे माहौल में छोटे बच्चों का सुरक्षित रहना और मन लगाकर पढ़ाई करना अपने आप में बड़ी चुनौती है।
आखिर कब बदलेगी तस्वीर?
एक तरफ बिहार में सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ समस्तीपुर के इस स्कूल की तस्वीरें कई सवाल खड़े करती हैं।
क्या इन बच्चों को भी एक सुरक्षित क्लासरूम, बेंच-डेस्क, पंखा और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए?
इन मासूम बच्चों के हाथों में किताबें हैं और आंखों में बेहतर भविष्य का सपना। जरूरत सिर्फ इतनी है कि उन्हें पढ़ने के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके।