CEO ने कहा- ‘मालिक की तरह सोचो’, Gen Z कर्मचारी ने दिया ऐसा जवाब, उड़ गए होश!
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक Gen Z कर्मचारी और उसके CEO के बीच हुई बातचीत खूब वायरल हो रही है। मामला काम के घंटे, ऑफिस में अतिरिक्त समय देने और कर्मचारी से कंपनी के प्रति उम्मीदों से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि कर्मचारी रोज सुबह तय समय से पहले ऑफिस पहुंचता था और शाम को ठीक 5 बजे अपना काम खत्म करके घर चला जाता था। उसकी यह समय की पाबंदी CEO को पसंद नहीं आई। जब बॉस ने उसे समझाने की कोशिश की तो कर्मचारी ने ऐसा सवाल पूछ दिया, जिससे पूरी बातचीत का रुख ही बदल गया।
वायरल पोस्ट के मुताबिक, कर्मचारी रोजाना सुबह 9 बजे शुरू होने वाली शिफ्ट से पहले ऑफिस पहुंचता था। शाम करीब 4:50 बजे वह अपना काम समेटना शुरू कर देता और ठीक 5 बजे कंप्यूटर बंद करके ऑफिस से निकल जाता था। वह न 4:59 बजे जाता था और न ही 5:01 बजे तक रुकता था।
कर्मचारी के इस तय रूटीन से परेशान CEO ने उसे बातचीत के लिए बुलाया। CEO ने कथित तौर पर कहा कि अगर उसे कंपनी में आगे बढ़ना है तो उसे सिर्फ कर्मचारी की तरह नहीं, बल्कि मालिक की तरह सोचना चाहिए। बॉस का कहना था कि मालिक काम के घंटे देखकर नहीं चलता। उसका ध्यान इस बात पर रहता है कि काम पूरा हो और कंपनी आगे बढ़े।
CEO की बात सुनने के बाद कर्मचारी ने बेहद सीधा सवाल कर दिया। उसने पूछा कि अगर उससे मालिक की तरह सोचने और काम करने की उम्मीद की जा रही है, तो क्या उसे कंपनी में 50 फीसदी हिस्सेदारी दी जाएगी?
कर्मचारी ने अपनी बात समझाते हुए कहा कि मालिक कंपनी में जोखिम उठाता है, फैसले लेता है और कंपनी के मुनाफे में उसका हिस्सा होता है। दूसरी ओर कर्मचारी तय वेतन पर काम करता है। इसलिए अगर उससे मालिक जैसी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता की उम्मीद की जा रही है, तो उसे मालिक जैसा लाभ भी मिलना चाहिए।
बताया जाता है कि CEO ने कर्मचारी की बात को हंसी में टाल दिया और स्पष्ट किया कि उनका मतलब कंपनी की हिस्सेदारी देना नहीं था। लेकिन तभी शाम के करीब 5 बजने वाले थे। कर्मचारी ने अपना सामान समेटा और घर जाने के लिए तैयार हो गया।
CEO ने जब उससे पूछा कि वह कहां जा रहा है, तो कर्मचारी ने कथित तौर पर कहा कि उसकी नौकरी का समय 5 बजे तक है और अब वह घर जा रहा है। अगले दिन भी वह अपने तय समय से पहले ऑफिस पहुंच गया।
इस पूरी घटना ने सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई लोगों का कहना है कि अगर कर्मचारी अपना काम समय पर पूरा कर रहा है और तय लक्ष्य हासिल कर रहा है तो सिर्फ ज्यादा देर तक ऑफिस में बैठना मेहनत का पैमाना नहीं होना चाहिए।
वहीं कुछ लोगों का मानना है कि करियर में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी लेना जरूरी है। हालांकि, इस वायरल कहानी ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा किया है—अगर कंपनियां कर्मचारियों से मालिक जैसा समर्पण चाहती हैं, तो क्या उन्हें उसके बदले मालिक जैसी हिस्सेदारी या अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी देना चाहिए?