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मौत के 10 घंटे बाद भी आंखें महसूस कर सकती हैं रोशनी? वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक, जानें कैसे करती है काम

 

मौत के बाद शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जिसने इस धारणा को चुनौती दी है। शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक के जरिए यह दिखाया है कि इंसानी आंख का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रेटिना (Retina) मौत के कई घंटे बाद भी सक्रिय रखा जा सकता है और वह रोशनी को महसूस करने की क्षमता बनाए रख सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, रेटिना आंख के पीछे मौजूद एक बेहद संवेदनशील परत होती है, जो रोशनी को पकड़कर उसे विद्युत संकेतों में बदलती है। यही संकेत आगे दिमाग तक पहुंचते हैं और हमें देखने का अनुभव होता है। सामान्य स्थिति में मौत के बाद ऑक्सीजन और ऊर्जा की कमी के कारण रेटिना की कोशिकाएं तेजी से निष्क्रिय होने लगती हैं।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने एक खास तकनीक विकसित की, जिसमें मृत व्यक्ति की आंखों से निकाले गए रेटिना को नियंत्रित वातावरण में रखा गया। इस प्रक्रिया में कोशिकाओं को जरूरी पोषक तत्व, ऑक्सीजन और विशेष रासायनिक परिस्थितियां उपलब्ध कराई गईं, जिससे रेटिना की कोशिकाएं दोबारा सक्रिय रह सकीं।

इस प्रयोग में वैज्ञानिकों ने पाया कि मृत्यु के करीब 10 घंटे बाद भी रेटिना की कुछ कोशिकाएं रोशनी के प्रति प्रतिक्रिया दे रही थीं। खासतौर पर फोटोरिसेप्टर कोशिकाएं, जो प्रकाश को पहचानने का काम करती हैं, उनमें गतिविधि देखी गई।

यह खोज आंखों और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे भविष्य में आंखों की बीमारियों को समझने, नई दवाओं के परीक्षण और दृष्टि से जुड़ी समस्याओं के इलाज में मदद मिल सकती है।

इस शोध से यह भी पता चलता है कि शरीर के सभी हिस्से एक ही समय पर पूरी तरह निष्क्रिय नहीं होते। कुछ कोशिकाएं सही परिस्थितियां मिलने पर मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक अपनी जैविक गतिविधियां जारी रख सकती हैं।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह साफ किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि कोई मृत व्यक्ति दोबारा देख सकता है। यह प्रक्रिया केवल रेटिना की कोशिकाओं की गतिविधि को बनाए रखने से जुड़ी है, न कि पूरी आंख और दिमाग के बीच देखने की क्षमता को वापस लाने से।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह खोज भविष्य की चिकित्सा तकनीकों के लिए एक नई दिशा खोल सकती है। इससे न सिर्फ मानव आंख की कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी, बल्कि अंगों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और प्रत्यारोपण से जुड़े शोध में भी नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

वैज्ञानिकों की यह खोज एक बार फिर साबित करती है कि मानव शरीर और उसकी कोशिकाओं के बारे में अभी भी कई रहस्य सामने आने बाकी हैं। मौत के बाद भी कुछ कोशिकाओं की सक्रियता को समझना चिकित्सा विज्ञान के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।