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सरकारी एम्बुलेंस से पहले पहुंची Blinkit, सत्य निकेतन हादसे के इस video ने खोली सिस्टम की पोल?

 

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। मलबे में छात्रों समेत कई लोगों के दबे होने की खबर ने हर किसी को झकझोर दिया।लेकिन इस हादसे के बाद राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दावा है कि सरकारी एम्बुलेंस को मौके तक पहुंचने में करीब 45 मिनट लगे, जबकि Blinkit की एम्बुलेंस लगभग 10 मिनट में पहुंच गई और उसने बिना किसी शुल्क के मदद की।

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद है !

सबसे चिंता की बात है कि मलबे में छात्रों समेत कई लोगों के दबे होने की खबर है

और व्यवस्था ऐसी की सरकारी एम्बुलेंस को पहुंचने में करीब 45 मिनट लगे

जबकि Blinkit की एम्बुलेंस 10 मिनट में पहुंच गई और वो भी बिना किसी शुल्क के

NSUI… pic.twitter.com/OS0NRw6MH8

— Rebellious 2.0🕊️ (@RebelliousPari8) September 7, 2026

सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद है !

सबसे चिंता की बात है कि मलबे में छात्रों समेत कई लोगों के दबे होने की खबर है

और व्यवस्था ऐसी की सरकारी एम्बुलेंस को पहुंचने में करीब 45 मिनट लगे

जबकि Blinkit की एम्बुलेंस 10 मिनट में पहुंच गई और वो भी बिना किसी शुल्क के

NSUI… pic.twitter.com/OS0NRw6MH8

— Rebellious 2.0🕊️ (@RebelliousPari8) September 7, 2026


हादसे के बाद NSUI और DU के छात्र भी मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुटे रहे। मुश्किल वक्त में छात्रों ने जिस तरह आगे बढ़कर मदद की, वह काबिल-ए-तारीफ है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर आपात स्थिति में सरकारी व्यवस्था इतनी धीमी क्यों पड़ जाती है?

जब किसी इमारत के मलबे में लोगों की जिंदगी फंसी हो, तब हर एक मिनट बेहद कीमती होता है। ऐसे समय में एम्बुलेंस, बचाव दल और जरूरी मेडिकल मदद जितनी जल्दी पहुंचे, उतना ही किसी की जान बचने का मौका बढ़ता है।

अगर निजी व्यवस्था सरकारी सिस्टम से पहले मौके पर पहुंच रही है, तो निश्चित तौर पर व्यवस्था की रफ्तार और आपातकालीन तैयारियों पर सवाल उठेंगे।

आखिर कब तक ऐसे हादसों के बाद सिस्टम की कमियां सामने आती रहेंगी?
कब तक लोगों को समय पर मदद मिलने का इंतजार करना पड़ेगा?

जरूरत सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई करने की नहीं, बल्कि ऐसी आपात स्थितियों के लिए तेज, जिम्मेदार और बेहतर व्यवस्था तैयार करने की है।