इंसानों के शोर से चिड़िया ने बदली अपनी आवाज, वैज्ञानिकों ने बताया क्यों बदल रहा है पक्षियों का व्यवहार
शहरों में बढ़ता ट्रैफिक, वाहनों के हॉर्न, मशीनों की आवाज और लगातार बढ़ता मानवीय शोर सिर्फ इंसानों के लिए परेशानी का कारण नहीं बन रहा, बल्कि इसका असर पक्षियों पर भी पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि कुछ पक्षी शोर वाले इलाकों में अपनी आवाज और गाने के तरीके में बदलाव करते हैं। ऐसा इसलिए होता है ताकि उनकी आवाज आसपास के शोर में दब न जाए और वे अपने साथी या दूसरे पक्षियों तक संदेश पहुंचा सकें।
पक्षियों के लिए उनकी आवाज सिर्फ गाने या मनोरंजन का माध्यम नहीं होती। वे आवाज के जरिए साथी को आकर्षित करने, अपने क्षेत्र की जानकारी देने और खतरे का संकेत देने जैसे कई महत्वपूर्ण काम करते हैं। ऐसे में जब उनके आसपास लगातार तेज आवाज रहती है तो उनके लिए सामान्य तरीके से संवाद करना मुश्किल हो जाता है।
शोर बढ़ा तो आवाज में आया बदलाव
शहरों और सड़कों के आसपास रहने वाले कुछ पक्षियों ने अपने संचार के तरीके में बदलाव किया है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि पक्षी कई बार ज्यादा ऊंची आवाज में गाने लगते हैं या अपनी आवाज की पिच और समय में बदलाव करते हैं।
कुछ प्रजातियां सुबह के समय जल्दी गाना शुरू कर देती हैं, जब आसपास मानवीय गतिविधियां अपेक्षाकृत कम होती हैं। वहीं कुछ पक्षी शहरी शोर के बीच अपनी आवाज को ज्यादा तेज या अलग आवृत्ति में निकालने की कोशिश करते हैं।
इस व्यवहार को वैज्ञानिक पक्षियों का अपने वातावरण के अनुसार अनुकूलन मानते हैं। हालांकि हर पक्षी प्रजाति शोर का सामना एक ही तरीके से नहीं करती। अलग-अलग प्रजातियों और परिस्थितियों के अनुसार उनकी प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
सिर्फ आवाज नहीं, व्यवहार पर भी असर
मानवीय शोर का असर पक्षियों के व्यवहार तक सीमित नहीं है। लगातार शोर उनके भोजन खोजने, साथी को आकर्षित करने और खतरे की पहचान करने जैसे व्यवहारों को भी प्रभावित कर सकता है। यदि किसी पक्षी की आवाज उसके साथी तक ठीक से नहीं पहुंचती तो उसके प्रजनन व्यवहार पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरीकरण बढ़ने के साथ पक्षियों के प्राकृतिक आवास तेजी से बदल रहे हैं। पेड़ों और हरियाली की कमी के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी उनके लिए नई चुनौती बन रहा है।
शहरों में बढ़ता साउंड पॉल्यूशन बना चुनौती
भारत सहित दुनिया के कई देशों में शहरों में ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। सड़क यातायात, निर्माण कार्य, औद्योगिक गतिविधियां और दूसरे मानवीय स्रोत इसका प्रमुख कारण हैं। इंसानों को जहां तेज शोर से तनाव और नींद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, वहीं वन्यजीवों के लिए यह उनके प्राकृतिक संचार तंत्र में बाधा पैदा कर सकता है।
पक्षियों की आवाज में आया बदलाव इस बात का संकेत माना जा सकता है कि वे अपने आसपास बदलते वातावरण के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि वैज्ञानिकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ऐसे बदलाव लंबे समय में पक्षियों की आबादी और उनके प्रजनन पर कितना असर डाल सकते हैं।
प्रकृति के लिए शांत माहौल जरूरी
पक्षियों की आवाज में बदलाव इंसानों के लिए एक तरह का पर्यावरणीय संकेत भी है। शहरों में पेड़-पौधों और हरित क्षेत्रों को बढ़ावा देने के साथ ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना जरूरी है। शांत और प्राकृतिक वातावरण न केवल इंसानों के लिए बेहतर है, बल्कि पक्षियों और दूसरे जीवों के लिए भी जरूरी है।
इसलिए जब किसी शहर में चिड़ियों की आवाज बदलती सुनाई दे, तो यह सिर्फ उनके गाने का बदलाव नहीं हो सकता। इसके पीछे उनके आसपास बदलता पर्यावरण और बढ़ता मानवीय शोर भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।