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अरबपति ब्रायन जॉनसन का दावा- लैब में तैयार किया अपना ‘बेबी क्लोन’, जानिए इस चौंकाने वाले प्रयोग की सच्चाई

 

दुनिया भर में अपनी उम्र कम करने और शरीर को युवा बनाए रखने के प्रयोगों के लिए चर्चा में रहने वाले अरबपति ब्रायन जॉनसन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 48 वर्षीय जॉनसन ने दावा किया है कि उन्होंने लैब में अपनी ही जैविक सामग्री से एक ‘बेबी क्लोन’ तैयार किया है। उनके इस दावे ने विज्ञान और टेक्नोलॉजी की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है।

ब्रायन जॉनसन लंबे समय से एंटी-एजिंग (Anti-Aging) और जीवन विस्तार से जुड़े प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। वह अपने शरीर को युवा बनाए रखने के लिए डाइट, एक्सरसाइज, मेडिकल टेस्ट और अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लेते रहे हैं। अब उनके कथित क्लोनिंग प्रयोग ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

जॉनसन के अनुसार, यह प्रयोग एक आधुनिक जैविक तकनीक से जुड़ा है, जिसमें उनकी कोशिकाओं से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने दावा किया कि लैब में तैयार किया गया यह ‘बेबी क्लोन’ उनकी आनुवंशिक पहचान से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, वैज्ञानिक समुदाय में इस दावे को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों की क्लोनिंग एक बेहद जटिल और विवादित विषय है। वर्तमान वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, किसी इंसान का पूरी तरह से सफल क्लोन तैयार करना अब भी एक बड़ी चुनौती है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, कोशिकाओं और डीएनए पर आधारित प्रयोगों से किसी व्यक्ति की आनुवंशिक जानकारी का अध्ययन जरूर किया जा सकता है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की हूबहू प्रतिकृति यानी क्लोन बन जाना अलग और बेहद कठिन प्रक्रिया है।

ब्रायन जॉनसन इससे पहले भी अपने Project Blueprint के कारण चर्चा में रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत वह अपने शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए कई तरह के प्रयोग करते हैं। वह नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच, नियंत्रित भोजन और जीवनशैली से जुड़े नियमों का पालन करते हैं।

सोशल मीडिया पर उनके इस नए दावे को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। कुछ लोग इसे भविष्य की जैव तकनीक की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे विज्ञान की सीमाओं और नैतिक सवालों से जोड़कर देख रहे हैं।

मानव क्लोनिंग को लेकर दुनिया भर में कई नैतिक और कानूनी सवाल मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल अगर भविष्य में संभव भी होता है, तो इसके लिए कड़े नियम और सुरक्षा मानक जरूरी होंगे।

फिलहाल ब्रायन जॉनसन का यह दावा चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, वैज्ञानिक प्रमाण और स्वतंत्र शोध के बिना इस तरह के दावों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आधुनिक विज्ञान में संभावनाओं के साथ-साथ कई बड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं।