बिहार का अनोखा गांव 'बहुरूपिया', जहां हर शुभ काम से पहले होती है बहुरूपी बाबा की पूजा
भारत अपने अनोखे रीति-रिवाजों और परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी कई मान्यताएं और परंपराएं देखने को मिलती हैं, जिनके पीछे सदियों पुरानी कहानियां और लोक आस्थाएं जुड़ी होती हैं। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में भी एक ऐसा ही गांव है, जो अपनी अनोखी परंपरा की वजह से चर्चा में रहता है।
इस गांव का नाम ही 'बहुरूपिया' है और यहां हर शुभ काम से पहले एक खास पूजा करने की परंपरा निभाई जाती है। शादी-विवाह हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान, ग्रामीण सबसे पहले बहुरूपी बाबा की पूजा करते हैं।
हर शुभ कार्य से पहले होती है बहुरूपी बाबा की पूजा
पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली प्रखंड में स्थित बहुरूपिया गांव की सबसे खास बात यहां की वर्षों पुरानी मान्यता है। गांव में जब भी कोई शादी, पूजा-पाठ या अन्य मांगलिक कार्यक्रम होता है, तो उससे पहले बहुरूपी बाबा को याद किया जाता है।
ग्रामीणों का मानना है कि बहुरूपी बाबा की पूजा करने से शुभ कार्य बिना किसी बाधा के पूरा होता है और परिवार पर बाबा की कृपा बनी रहती है।
पूजा में चढ़ाई जाती है रोटी और चीनी
बहुरूपी बाबा की पूजा की परंपरा भी काफी अलग है। इस पूजा के दौरान बाबा को रोटी और चीनी का भोग लगाया जाता है।
ग्रामीण श्रद्धा के साथ यह प्रसाद चढ़ाते हैं और इसके बाद ही शुभ कार्यक्रमों की शुरुआत करते हैं। यह परंपरा गांव के लोगों के लिए सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का हिस्सा है।
बेतिया राज से जुड़ा है इतिहास
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बहुरूपिया बाबा की परंपरा का संबंध पुराने बेतिया राज के समय से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि उस दौर में बहुरूपिया बाबा की विशेष मान्यता थी और तभी से उनकी पूजा की परंपरा चली आ रही है।
पीढ़ी दर पीढ़ी ग्रामीण इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं। समय बदलने के बावजूद गांव के लोगों की आस्था आज भी पहले जैसी बनी हुई है।
गांव के नाम के पीछे भी है खास कहानी
बहुरूपिया गांव का नाम भी लोगों के बीच उत्सुकता का विषय रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव और बहुरूपी बाबा की मान्यता के बीच गहरा संबंध है।
यही वजह है कि यह गांव अपनी संस्कृति और परंपराओं के कारण आसपास के इलाकों में अलग पहचान रखता है।
आस्था और परंपरा की अनोखी मिसाल
आज के आधुनिक दौर में जहां कई पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं, वहीं बहुरूपिया गांव के लोग अपनी सदियों पुरानी मान्यता को अब भी पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं।
बिहार का यह गांव दिखाता है कि भारत के गांवों में आज भी ऐसी कई अनोखी परंपराएं मौजूद हैं, जो इतिहास, संस्कृति और लोगों की आस्था को एक साथ जोड़कर रखती हैं।