×

हांगकांग में भारतीय महिला के लिए फरिश्ता बनी मालकिन, जुटाए 4.7 लाख रुपए; दर्द भरी है कहानी
 

 

विदेश में रहकर काम करने वाले कई भारतीयों के लिए जिंदगी आसान नहीं होती। अपने परिवार से दूर रहकर संघर्ष कर रहे लोगों के बीच कभी-कभी कोई ऐसा इंसान मिल जाता है, जो मुश्किल वक्त में सहारा बन जाता है। हांगकांग में रहने वाली एक भारतीय महिला की ऐसी ही दर्द भरी कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जहां उसकी मालकिन ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए उसके लिए 4.7 लाख रुपये जुटाए।

बीमारी और आर्थिक संकट से जूझ रही थी महिला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय महिला हांगकांग में घरेलू कामगार के रूप में काम करती थी। अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई और वह गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझने लगी। इलाज का खर्च काफी ज्यादा था और उसके पास इतनी बड़ी रकम जुटाने का कोई साधन नहीं था।

विदेश में अकेले रहते हुए बीमारी और पैसों की कमी ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। ऐसे समय में उसकी मालकिन ने उसकी मदद करने का फैसला किया।

मालकिन ने लोगों से मांगी मदद

महिला की हालत देखकर उसकी मालकिन ने सोशल मीडिया और अपने जान-पहचान के लोगों के जरिए मदद की अपील की। उन्होंने महिला के इलाज के लिए आर्थिक सहायता जुटानी शुरू की।

धीरे-धीरे लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया और देखते ही देखते करीब 4.7 लाख रुपये इकट्ठा हो गए। यह रकम महिला के इलाज और जरूरी खर्चों के लिए काफी मददगार साबित हुई।

‘नौकर नहीं, परिवार का हिस्सा समझा’

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोग मालकिन की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि विदेश में रहने वाले प्रवासी कामगारों के लिए ऐसी मदद किसी वरदान से कम नहीं होती।

कई लोगों ने लिखा कि इंसानियत का रिश्ता किसी देश, भाषा या सीमा से बड़ा होता है। मालकिन ने जिस तरह अपनी कर्मचारी की मदद की, वह रिश्तों की एक खूबसूरत मिसाल है।

वायरल हुई भावुक कहानी

इस घटना की कहानी सामने आने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। कुछ यूजर्स ने बताया कि विदेशों में काम करने वाले कई लोग मुश्किल परिस्थितियों में अकेले पड़ जाते हैं और ऐसे समय में किसी का साथ मिलना उनके लिए बहुत मायने रखता है।

यह कहानी एक बार फिर दिखाती है कि छोटी सी मदद भी किसी की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है। हांगकांग की इस मालकिन ने साबित कर दिया कि अच्छे रिश्ते सिर्फ खून के नहीं, बल्कि संवेदनाओं और भरोसे से भी बनते हैं।