66 लाख रुपये की नौकरी छोड़ बनी रिसेप्शनिस्ट, 40% कम सैलरी में मिली मानसिक शांति, ऑस्ट्रेलिया की ग्रेस की कहानी वायरल
ऑस्ट्रेलिया की 34 वर्षीय ग्रेस मैक्लेलैंड ने करियर और सफलता को लेकर एक ऐसा फैसला लिया, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। ग्रेस ने करीब 1 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी लगभग 66 लाख रुपये सालाना की नौकरी छोड़कर रिसेप्शनिस्ट की नौकरी स्वीकार कर ली। इस नई नौकरी में उन्हें अपनी पुरानी सैलरी से करीब 40 फीसदी कम कमाई होती है, लेकिन ग्रेस का कहना है कि इसके बदले उन्हें मानसिक शांति और जिंदगी जीने का समय मिल गया है।
अच्छी सैलरी के बावजूद बढ़ रहा था तनाव
ग्रेस ने कई साल तक एक बड़े फैशन रिटेल ब्रांड में काम किया और धीरे-धीरे स्टोर मैनेजर के पद तक पहुंचीं। करियर में प्रमोशन और अच्छी कमाई के बावजूद उनका काम बेहद तनावपूर्ण होता गया। कभी सुबह जल्दी काम शुरू करना तो कभी देर रात तक स्टोर बंद करना, स्टाफ की समस्याएं, बिक्री के लक्ष्य और ग्राहकों से जुड़े विवाद उनके लिए लगातार दबाव का कारण बनने लगे।
ग्रेस के मुताबिक, नौकरी का असर उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ रहा था। काम से घर लौटने के बाद उनके पास किसी दूसरे काम या शौक के लिए ऊर्जा नहीं बचती थी। उन्होंने बताया कि उस दौर में उनका तनाव काफी बढ़ गया था और काम पर आने-जाने के दौरान भी उन्हें बेचैनी महसूस होती थी।
एक बार फिर मिली अच्छी सैलरी, लेकिन फैसला नहीं बदला
तनाव के कारण ग्रेस ने एक समय नौकरी छोड़ दी और दूसरी जगह ऑफिस की नौकरी शुरू की, लेकिन वहां का माहौल उन्हें पसंद नहीं आया। इसके बाद उन्हें एक लग्जरी रिटेल कंपनी में दोबारा मैनेजमेंट की नौकरी और बेहतर पैकेज का प्रस्ताव मिला। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया।
इस नौकरी में उनकी कमाई करीब 1 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर सालाना थी। आर्थिक रूप से सबकुछ अच्छा होने के बावजूद ग्रेस को महसूस हुआ कि समस्या केवल कंपनी या नौकरी की नहीं थी। उन्हें खुद ही यह महसूस होने लगा कि वह अपने काम से जुड़ाव खो चुकी हैं और सिर्फ जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
जुलाई 2024 में बनीं रिसेप्शनिस्ट
आखिरकार ग्रेस ने दोबारा रिटेल मैनेजमेंट छोड़ने का फैसला किया। कुछ समय का ब्रेक लेने के बाद उन्होंने अपने घर के नजदीक कम दबाव वाली नौकरियों के लिए आवेदन किया। जुलाई 2024 में उन्हें एक रिटेल हेड ऑफिस में रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर की नौकरी मिल गई।
इस नौकरी में उनकी आय पहले की तुलना में करीब 40 फीसदी कम है, लेकिन ग्रेस के अनुसार अब वह काम से घर लौटने के बाद थकी और चिड़चिड़ी महसूस नहीं करतीं। उनके पास अपने शौक पूरे करने और सोशल मीडिया पर काम करने के लिए भी ज्यादा समय है।
ग्रेस ने बताया सफलता का नया मतलब
ग्रेस का कहना है कि उन्होंने इस बदलाव से सीखा कि सफलता को केवल सैलरी या नौकरी के पद से नहीं मापा जाना चाहिए। उनके लिए अब स्वास्थ्य, मानसिक शांति और निजी जिंदगी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर व्यक्ति के लिए इतनी बड़ी सैलरी कटौती संभव नहीं होती और ऐसा फैसला लेने से पहले आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
उनका मानना है कि इंसान की पहचान केवल उसके जॉब टाइटल से नहीं होती। अगर ज्यादा कमाई के बदले लगातार तनाव और असंतोष मिल रहा है, तो जिंदगी की प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करना जरूरी हो सकता है। ग्रेस की कहानी इसी सोच को सामने रखती है कि कभी-कभी कम कमाई में बेहतर जिंदगी, ज्यादा कमाई वाली तनावपूर्ण जिंदगी से ज्यादा संतोष दे सकती है।