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गन्ने के खाली खेत को बना दिया घना जंगल, 10 साल में ऑस्ट्रेलियन महिला ने उगाए 1,19,000 पेड़

 

आमतौर पर लोग जमीन खरीदते हैं तो उस पर घर, फार्महाउस या खेती करने का सपना देखते हैं। लेकिन ऑस्ट्रेलिया की एनी शोएनबर्गर ने अपनी जमीन को लेकर बिल्कुल अलग सपना देखा। उन्होंने गन्ने की खेती के बाद खाली पड़ी जमीन खरीदी और फैसला किया कि यहां दोबारा जंगल उगाया जाएगा। करीब एक दशक की मेहनत के बाद उनका सपना ऐसी हकीकत में बदला कि कभी खाली दिखने वाली जमीन आज हजारों पेड़ों से घिरे युवा वर्षावन का रूप ले चुकी है।

2014 में खरीदी जमीन, जंगल बनाने का था सपना

यह कहानी ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड की है। एनी शोएनबर्गर ने साल 2014 में करीब 18 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। यह इलाका पहले गन्ने की खेती के लिए इस्तेमाल होता था और प्राकृतिक वनस्पतियों का बड़ा हिस्सा हट चुका था। एनी का मकसद इस जमीन को किसी व्यावसायिक प्रोजेक्ट में बदलना नहीं था, बल्कि यहां मूल वर्षावन को वापस लाना था।

इसके बाद साल 2015 से जमीन के पुनर्वनीकरण का काम शुरू हुआ। धीरे-धीरे अलग-अलग स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाने लगे और इस काम में स्वयंसेवकों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने भी मदद की।

10 साल में लगाए 1.19 लाख से ज्यादा पेड़

इस प्रोजेक्ट की सबसे हैरान करने वाली बात पेड़ों की संख्या है। करीब 10 वर्षों में यहां 1,19,000 से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। यह काम एक ही बार में नहीं हुआ, बल्कि लगातार चलने वाले कई पौधारोपण अभियानों के जरिए जमीन का कायाकल्प किया गया।

2023 में भी 140 से ज्यादा लोगों ने एक सामुदायिक पौधारोपण अभियान में हिस्सा लिया और करीब 3,300 पेड़ लगाए। इस तरह एनी की निजी पहल धीरे-धीरे समुदाय के सहयोग से बड़े पर्यावरणीय अभियान में बदल गई।

खाली खेत में लौटने लगे वन्यजीव

पेड़ बढ़े तो सिर्फ जमीन का रंग नहीं बदला, बल्कि वहां का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बदलने लगा। इस नए जंगल में फ्लाइंग फॉक्स यानी बड़े फल खाने वाले चमगादड़ों समेत कई वन्यजीवों को नया ठिकाना मिला है। रिपोर्टों के मुताबिक इस क्षेत्र में 75 से ज्यादा जीव प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है।

कभी जहां गन्ने की खेती के बाद खाली जमीन दिखाई देती थी, वहीं अब पेड़ों और वनस्पतियों ने वन्यजीवों के लिए भोजन और आश्रय उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।

सिर्फ पेड़ नहीं लगाए, वेटलैंड भी सुधारे

एनी और उनके सहयोगियों की कोशिश केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं रही। परियोजना के तहत इलाके की आर्द्रभूमि यानी वेटलैंड को भी बहाल करने पर काम किया गया। इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार और प्राकृतिक आवास को मजबूत करने में मदद मिली।

यह इलाका अब वन्यजीवों के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर के रूप में भी काम कर रहा है। यानी जंगल के छोटे-छोटे हिस्सों के बीच जानवरों के आवागमन के लिए भी बेहतर प्राकृतिक रास्ता तैयार हुआ है।

सरकार ने भी माना प्रकृति संरक्षण का महत्व

एनी के प्रयास को आधिकारिक मान्यता भी मिली। 2026 में क्वींसलैंड सरकार ने इस 18 हेक्टेयर क्षेत्र को उच्च प्रकृति संरक्षण मूल्य वाले क्षेत्र के रूप में मान्यता दी। रिपोर्टों के अनुसार इसे संरक्षण की अतिरिक्त सुरक्षा भी मिली है।

सबसे बड़ी बात यह है कि यह कहानी सिर्फ 1,19,000 पेड़ों की संख्या की नहीं है। यह दिखाती है कि अगर लंबे समय तक लगातार प्रयास किया जाए तो इंसान कृषि या विकास के कारण बदले हुए किसी भूभाग को दोबारा प्रकृति के करीब ला सकता है। एनी शोएनबर्गर का यह प्रयोग आज पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी की एक प्रेरक मिसाल बन चुका है।