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आशुतोष रांका ने जेल में बंद रहने के क्या-क्या फायदे गिनाए, कहा- 2-3 दिन तक तो खूब सोए और फिर…
 

 

तिहाड़ जेल में करीब एक सप्ताह बिताने के बाद बाहर आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका अपने जेल के अनुभव को लेकर चर्चा में हैं। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने वहां के अनुभव साझा किए और तिहाड़ की व्यवस्थाओं तथा खाने की तारीफ की। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्होंने खूब नींद पूरी की। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। 

पहले 2-3 दिन खूब सोए

आशुतोष रांका के जेल के अनुभव को लेकर सामने आई चर्चा में शुरुआती दिनों में आराम करने और नींद पूरी करने की बात प्रमुखता से सामने आई है। जेल में रहने के दौरान उनकी दिनचर्या सामान्य जीवन से अलग रही। हालांकि, शुरुआती 2-3 दिनों तक खूब सोने वाले कथन का पूरा वीडियो या शब्दशः बयान उपलब्ध न होने के कारण इसे उनके प्रमाणित प्रत्यक्ष उद्धरण के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

तिहाड़ के खाने की तारीफ की

जेल से बाहर आने के बाद एक कंटेंट क्रिएटर से बातचीत में रांका ने तिहाड़ जेल के खाने को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि जेल का अनुभव तो जेल का अनुभव है, लेकिन वहां सब ठीक रहा। उन्होंने खाने की तारीफ करते हुए तिहाड़ की व्यवस्थाओं को भी अच्छा बताया।रांका ने यह भी कहा कि जेल जाने से पहले उन्होंने जेल सुधार आंदोलन चलाने की बात कही थी। लेकिन जेल के भीतर का अनुभव लेने के बाद उन्होंने तिहाड़ की व्यवस्था को अच्छा बताया। 

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हुई थी गिरफ्तारी

आशुतोष रांका और सीजेपी के दूसरे सह-संयोजक सौरव दास को अक्टूबर में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। पुलिस के अनुसार, दोनों ने प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने की कोशिश की थी। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।दोनों की न्यायिक हिरासत बाद में बढ़ाई गई। 21 अक्टूबर को संबंधित अदालत ने उन्हें शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया। रिहाई के लिए 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार की शर्त रखी गई थी। दोनों ने शांति बनाए रखने और निर्धारित शर्तों का पालन करने का आश्वासन भी दिया। 

जेल के अनुभव पर क्यों हो रही चर्चा?

रांका की टिप्पणियां इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि आम तौर पर जेल के अनुभव को कठिन और चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जबकि उन्होंने तिहाड़ के खाने और व्यवस्थाओं की तारीफ की। हालांकि, उनका अनुभव व्यक्तिगत है और इसे जेल में रहने वाले सभी कैदियों के अनुभव के समान नहीं माना जा सकता।