अमरोहा तीन बहनों की शादी मामला: सहमति के बावजूद क्यों उठे कानूनी सवाल? जानें हिंदू विवाह अधिनियम और BNS के प्रावधान
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में तीन सगी बहनों के एक ही युवक से शादी करने का मामला चर्चा में आने के बाद अब इस पर कानूनी पहलुओं को लेकर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए शादी के वीडियो के बाद जहां लोग इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वहीं कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस मामले में विवाह की वैधता और कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि यह विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के तहत हुआ है और संबंधित पक्ष हिंदू विवाह अधिनियम के दायरे में आते हैं, तो एक व्यक्ति का एक ही समय में एक से अधिक महिलाओं से विवाह करना कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जाता। हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत विवाह के लिए यह जरूरी शर्त है कि विवाह के समय पति या पत्नी का कोई जीवित वैध जीवनसाथी नहीं होना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि आपसी सहमति से विवाह करने के बावजूद कानून अपनी जगह लागू रहता है। अगर कोई व्यक्ति पहले से विवाहित होने के बावजूद दूसरी या तीसरी शादी करता है, तो यह द्विविवाह (Bigamy) की श्रेणी में आ सकता है।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 के तहत द्विविवाह अपराध माना गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है। हालांकि, किसी भी मामले में अंतिम निर्णय जांच, दस्तावेजों और अदालत की सुनवाई के आधार पर ही होता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि अदालतों ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि यदि पहली शादी कानूनन वैध है, तो उसके रहते हुए की गई दूसरी शादी को वैध पत्नी का दर्जा नहीं मिल सकता। सुप्रीम कोर्ट भी कई फैसलों में कह चुका है कि कानून के तहत अवैध विवाह से जुड़े अधिकार सीमित होते हैं।
इस मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि शादी किस परिस्थिति में हुई, सभी पक्षों की उम्र क्या है, उनकी सहमति किस रूप में थी और क्या किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है।
वहीं, इस पूरे मामले को लेकर समाज में भी चर्चा जारी है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे सामाजिक और कानूनी व्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल अमरोहा का यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया की चर्चा तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अब इसके कानूनी पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस मामले में कानून के तहत आगे क्या कार्रवाई होगी।