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America Village : कैसे होते हैं अमेरिका के गांव, घरों में क्यों नहीं होती छत, जानें सबकुछ
 

 

भारत में गांव का नाम आते ही अक्सर कच्चे-पक्के मकान, खेत, आंगन, खपरैल या पक्की छत वाले घरों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन अगर आप अमेरिका के गांवों की तस्वीर देखें तो कई चीजें बिल्कुल अलग नजर आ सकती हैं। वहां के ग्रामीण इलाकों में घरों का डिजाइन, सड़कें, खेती का तरीका और जीवनशैली भारतीय गांवों से काफी अलग होती है। सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है वहां के कई घरों की ढलान वाली छत। दूर से देखने पर ऐसा लग सकता है कि घर पर छत ही नहीं है, लेकिन असल में छत होती है—बस उसका डिजाइन भारतीय फ्लैट रूफ से अलग होता है।

अमेरिका के गांव कैसे होते हैं?

अमेरिका में गांवों को भारत की तरह हर जगह एक ही तरह की बसावट के रूप में समझना सही नहीं है। वहां ग्रामीण इलाकों में छोटे कस्बे, फार्महाउस और बहुत कम आबादी वाले इलाके मिलते हैं।कई जगह एक घर से दूसरे घर के बीच काफी दूरी होती है। आसपास बड़े खेत, घास के मैदान, जंगल या खुली जमीन दिखाई दे सकती है। कई अमेरिकी फार्महाउस के पास बड़े शेड या खलिहान जैसे ढांचे भी होते हैं, जहां खेती और पशुपालन से जुड़ा सामान रखा जाता है।

घरों में सपाट छत क्यों कम दिखती है?

यही वह चीज है जो भारतीयों को सबसे ज्यादा हैरान करती है। अमेरिका के कई हिस्सों में घरों पर स्लोपिंग या पिच्ड रूफ बनाई जाती है। यानी छत एकदम सपाट नहीं होती, बल्कि ढलान वाली होती है।इस डिजाइन का एक बड़ा कारण वहां का मौसम है। अमेरिका के कई राज्यों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी होती है। ढलान वाली छत पर बर्फ और बारिश का पानी जमा रहने के बजाय नीचे की ओर निकल सकता है। हालांकि पूरे अमेरिका में मौसम एक जैसा नहीं है। गर्म और कम बर्फबारी वाले इलाकों में घरों की छतों का डिजाइन अलग भी हो सकता है।

छत के ऊपर एक और मंजिल जैसी जगह?

कई अमेरिकी घरों में ढलानदार छत के नीचे अटारी (Attic) होती है। यह जगह सामान रखने, इंसुलेशन और कभी-कभी अतिरिक्त रहने की जगह के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।इसी वजह से किसी घर को देखकर भारतीय नजरिए से लग सकता है कि उसकी छत बहुत अलग है या ऊपर कोई कमरा बना हुआ है। वास्तव में वह घर की पूरी रूफिंग और अटारी का हिस्सा हो सकता है।

घर लकड़ी के क्यों दिखते हैं?

अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में लकड़ी या लकड़ी आधारित सामग्री से बने घर काफी आम हैं। इसका संबंध वहां की निर्माण परंपरा, उपलब्ध सामग्री और आधुनिक निर्माण तकनीक से है।हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका के गांवों में सभी घर लकड़ी के ही होते हैं। ईंट, पत्थर, कंक्रीट और दूसरी निर्माण सामग्री से बने घर भी बड़ी संख्या में मिलते हैं।

खेत घर से काफी दूर तक फैले होते हैं

अमेरिकी ग्रामीण इलाकों की एक और खासियत बड़े-बड़े फार्म हैं। कई जगह घर के आसपास ही विशाल कृषि भूमि दिखाई देती है। खेती में बड़े ट्रैक्टर और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल आम है।कुछ फार्म इतने बड़े होते हैं कि खेत का एक हिस्सा घर से काफी दूर तक फैला होता है। इसलिए यहां ग्रामीण जीवन का स्वरूप भारत के छोटे खेतों और घनी बस्तियों वाले गांवों से काफी अलग नजर आता है।

गांव में भी सुविधाओं की कमी जरूरी नहीं

अमेरिका के ग्रामीण इलाकों को देखकर यह मान लेना गलत होगा कि वहां शहरों जैसी सुविधाएं बिल्कुल नहीं होतीं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की सड़कें, बिजली, इंटरनेट, वाहन और आधुनिक घरेलू सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।हालांकि बहुत कम आबादी वाले इलाकों में अस्पताल, बड़े बाजार या अन्य सेवाएं काफी दूर हो सकती हैं। ऐसे स्थानों पर निजी वाहन जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है।

क्या अमेरिका में ‘गांव’ की तस्वीर भारत जैसी है?

दोनों देशों के ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ा अंतर बसावट की घनत्व और भूगोल में दिखाई देता है। भारत के कई गांवों में घर एक-दूसरे के काफी करीब होते हैं, जबकि अमेरिका के ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के बीच कई बार लंबी दूरी होती है।भारत में खेतों के छोटे-छोटे हिस्से और घनी आबादी आम दृश्य हैं, जबकि अमेरिका के कई फार्म बड़े क्षेत्र में फैले होते हैं।

आखिर अमेरिका के गांव इतने अलग क्यों लगते हैं?

दरअसल, किसी देश के गांव वहां के मौसम, जमीन, खेती, अर्थव्यवस्था, निर्माण परंपरा और आबादी के हिसाब से विकसित होते हैं। अमेरिका में ढलान वाली छतें जहां बर्फ और बारिश जैसे मौसम से निपटने में मदद करती हैं, वहीं बड़े फार्म और दूर-दूर बने घर वहां की कम आबादी वाले ग्रामीण इलाकों की पहचान हैं।इसलिए अगली बार अमेरिका के किसी गांव की तस्वीर देखकर अगर आपको लगे कि “इन घरों पर छत ही नहीं है”, तो गौर से देखिए—छत मौजूद है, बस भारतीय घरों की तरह सपाट नहीं, बल्कि अक्सर ढलानदार डिजाइन में बनी होती है।