Amazing Facts: ताज महल को बनाने में कितना खर्च आया था? जानिए आज के हिसाब से इसकी कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान
दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताज महल अपनी बेमिसाल खूबसूरती और अद्भुत वास्तुकला के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक इसकी भव्यता को निहारने आगरा पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर भी ताज महल की तस्वीरें और वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस ऐतिहासिक इमारत को बनाने में कितना खर्च आया होगा? आइए जानते हैं ताज महल के निर्माण से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।
प्रेम की निशानी है ताज महल
ताज महल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की याद में करवाया था। मुमताज महल का निधन वर्ष 1631 में हुआ था, जिसके बाद शाहजहां ने उनकी स्मृति में एक भव्य मकबरे के निर्माण का फैसला लिया। ताज महल का निर्माण कार्य वर्ष 1632 में शुरू हुआ और इसे पूरा होने में करीब 22 वर्ष का समय लगा। माना जाता है कि इसका मुख्य निर्माण कार्य 1653 के आसपास पूरा हुआ था।
हजारों कारीगरों ने किया था काम
इतिहासकारों के अनुसार, ताज महल के निर्माण में लगभग 20,000 मजदूरों, कारीगरों और कलाकारों ने योगदान दिया था। इसके निर्माण में भारत के अलावा फारस, तुर्की और मध्य एशिया के कई विशेषज्ञों की सेवाएं ली गई थीं। संगमरमर, कीमती पत्थरों और बेहतरीन नक्काशी ने इस इमारत को दुनिया की सबसे शानदार धरोहरों में शामिल कर दिया।
उस दौर में कितना आया था खर्च?
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, ताज महल के निर्माण पर उस समय करीब 3.2 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। आज के समय में यह राशि सुनने में भले सामान्य लगे, लेकिन 17वीं शताब्दी में यह एक बेहद बड़ी रकम थी। उस दौर में इतने पैसों से कई बड़े राज्य संचालित किए जा सकते थे।
आज के हिसाब से कितनी होगी कीमत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ताज महल का निर्माण आज के समय में उसी गुणवत्ता, सामग्री और शिल्पकला के साथ किया जाए तो इसकी लागत हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। अलग-अलग अध्ययनों में इसकी अनुमानित कीमत 50,000 करोड़ रुपये से लेकर 1 लाख करोड़ रुपये या उससे भी अधिक बताई गई है। हालांकि इसकी वास्तविक कीमत का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है, क्योंकि ताज महल केवल एक इमारत नहीं बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वास्तुशिल्प विरासत का अनमोल प्रतीक है।
विश्व धरोहर का दर्जा
ताज महल को वर्ष 1983 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया था। इसके बाद से इसकी वैश्विक पहचान और भी बढ़ गई। आगरा स्थित यह स्मारक भारत की सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है और देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
आज भी कायम है आकर्षण
सदियों बीत जाने के बाद भी ताज महल का आकर्षण कम नहीं हुआ है। सफेद संगमरमर से बनी यह इमारत सूर्योदय, सूर्यास्त और चांदनी रात में अलग-अलग रंगों की छटा बिखेरती है। यही वजह है कि इसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। ताज महल सिर्फ प्रेम का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय कला, वास्तुकला और इतिहास की महान उपलब्धि भी है।