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₹7000 की साइकिल एक महीने भी नहीं चली? VIDEO ने खड़े किए सवाल

 

दिल्ली सरकार की छात्राओं के लिए शुरू की गई विद्या वाहिनी योजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। योजना के तहत 9वीं कक्षा की छात्राओं को मुफ्त साइकिल वितरित की गई थी, लेकिन अब कुछ छात्राओं की ओर से साइकिल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जाने का दावा किया जा रहा है।

दिल्ली -
साइकिल मिली है..लेकिन बहुत बेकार है - एक दो हफ्ते बाद ही टूट गई..!

दिल्ली में विद्या वाहिनी योजना के तहत मुक्त साइकिल का लाभ प्राप्त करने वाली स्कूल की बच्चियों को सुनिए...! 👇👇

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विद्या वाहिनी योजना के तहत 9 वीं की छात्राओं को मुफ्त साइकिल… pic.twitter.com/0ALdaowhiH

— Rahul Saini (@JtrahulSaini) September 4, 2026

दिल्ली -
साइकिल मिली है..लेकिन बहुत बेकार है - एक दो हफ्ते बाद ही टूट गई..!

दिल्ली में विद्या वाहिनी योजना के तहत मुक्त साइकिल का लाभ प्राप्त करने वाली स्कूल की बच्चियों को सुनिए...! 👇👇

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विद्या वाहिनी योजना के तहत 9 वीं की छात्राओं को मुफ्त साइकिल… pic.twitter.com/0ALdaowhiH

— Rahul Saini (@JtrahulSaini) September 4, 2026


वायरल पोस्ट के मुताबिक, कुछ छात्राओं का कहना है कि उन्हें मिली साइकिलें कुछ ही दिनों या एक-दो सप्ताह के इस्तेमाल के बाद खराब हो गईं। छात्राओं के कथित बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर योजना को लेकर बहस तेज हो गई है।

बताया गया है कि योजना के पहले चरण में जुलाई महीने में करीब 3000 साइकिलें, जबकि दूसरे चरण में अगस्त में 200 साइकिलें वितरित की गईं। इस तरह अब तक कुल 3200 साइकिलें बांटे जाने का दावा किया जा रहा है।

इसी बीच विपक्षी आम आदमी पार्टी की ओर से भी योजना को लेकर सवाल उठाए गए हैं। वायरल पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि बाजार में करीब 4000 रुपये की मिलने वाली साइकिल को सरकार ने कथित तौर पर 7000 रुपये में खरीदा। हालांकि, इस खरीद मूल्य और कथित घोटाले के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है।

अब विवाद का दूसरा पहलू साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर सामने आया है। कुछ छात्राओं के कथित अनुभवों के मुताबिक, साइकिलें लंबे समय तक इस्तेमाल करने से पहले ही खराब हो गईं। अगर ये दावे सही पाए जाते हैं, तो इससे सरकारी खरीद में गुणवत्ता जांच और सामान की टिकाऊपन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

योजना का उद्देश्य छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा देना और उनकी पढ़ाई को आसान बनाना है। ऐसे में अगर वितरित की गई साइकिलें जल्द खराब हो रही हैं, तो इससे योजना के वास्तविक उद्देश्य पर भी सवाल उठ सकते हैं।

फिलहाल सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक तरफ साइकिलों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ खरीद मूल्य को लेकर लगाए गए आरोपों की भी चर्चा हो रही है।

हालांकि, साइकिलों की वास्तविक गुणवत्ता, खरीद की कीमत और कथित अनियमितताओं को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए सरकारी दस्तावेजों और संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी होगी। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो जिम्मेदारी तय करने और खराब साइकिलों को बदलने की मांग भी उठ सकती है।