एक पैर से कूद-कूदकर स्कूली पहुंची दिव्यांग बच्ची, ट्राईसाइकिल के लिए लगाई गुहार; Video देख आंसू आ जाएंगे
सोशल मीडिया पर एक मासूम बच्ची का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों का दिल छू लिया है। वीडियो में एक दिव्यांग बच्ची अपनी पढ़ाई के जुनून के चलते एक पैर के सहारे कूदते-कूदते स्कूल जाती दिखाई दे रही है। बच्ची की हालत देखकर लोग भावुक हो गए और उसकी मदद के लिए आवाज उठाने लगे।
यह कहानी उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की 7 साल की बच्ची रागिनी की है। रागिनी मनियर क्षेत्र के रानीपुर गांव की रहने वाली है और प्राथमिक विद्यालय दिघेड़ा में कक्षा 1 की छात्रा है। बचपन में हुए हादसे में उसका एक पैर खराब हो गया था। इसके बावजूद उसने पढ़ाई का सपना नहीं छोड़ा और हर दिन करीब 400 मीटर का सफर तय कर स्कूल पहुंचती है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रागिनी स्कूल जाने के लिए सड़क पर एक पैर से कूदते हुए आगे बढ़ रही है। रास्ता आसान नहीं है, लेकिन उसके चेहरे पर पढ़ाई को लेकर उत्साह साफ दिखाई देता है। कई बार परेशानी होने के बावजूद वह हिम्मत नहीं हारती और अपनी मंजिल यानी स्कूल तक पहुंचने की कोशिश करती है।
रागिनी ने अपनी परेशानी बताते हुए प्रशासन से मदद की अपील की। उसने भावुक होकर कहा कि उसका एक पैर खराब है और उसे स्कूल आने-जाने के लिए ट्राईसाइकिल दिलवा दी जाए, ताकि वह रोजाना पढ़ाई करने आ सके। उसकी इस छोटी सी गुहार ने सोशल मीडिया पर लोगों को भावुक कर दिया।
बच्ची की कहानी सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उसकी मदद की मांग उठाई। लोगों का कहना है कि रागिनी जैसी बच्चियों को शिक्षा के रास्ते में आने वाली परेशानियों से लड़ने के लिए जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। एक ट्राईसाइकिल उसके लिए सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि उसके सपनों तक पहुंचने का जरिया बन सकती है।
रागिनी के वीडियो के वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लिया। अधिकारियों ने बच्ची की मदद के लिए कदम उठाने की बात कही और उसकी जरूरतों को पूरा करने का आश्वासन दिया। बाद में उसे ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने की जानकारी भी सामने आई।
रागिनी का सपना बड़ा है। वह आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती है। मुश्किल हालातों के बावजूद उसका पढ़ाई के प्रति जुनून यह दिखाता है कि अगर हौसला मजबूत हो तो चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स रागिनी की हिम्मत को सलाम कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस बच्ची ने साबित कर दिया कि शारीरिक परेशानी किसी के सपनों को रोक नहीं सकती। जरूरत है तो सिर्फ सही समय पर सहयोग और सुविधाओं की, ताकि रागिनी जैसे बच्चे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।