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₹2 लाख महीने की कमाई के बाद भी खाली जेब, 27 साल का टेक इंजीनियर ऐसे फंसा ₹20 लाख के कर्ज में

 

अच्छी नौकरी, मोटी सैलरी और शानदार लाइफस्टाइल को अक्सर आर्थिक सफलता की निशानी माना जाता है। लेकिन एक 27 साल के टेक इंजीनियर की कहानी ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस आपबीती में युवक ने बताया कि वह हर महीने करीब ₹2 लाख कमाने के बावजूद ₹20 लाख के कर्ज में फंस गया और आज उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।

टेक इंजीनियर ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि ऊंची सैलरी मिलने के बाद उसने खर्चों पर नियंत्रण नहीं रखा। शुरुआत में अच्छी कमाई ने उसे बेहतर लाइफस्टाइल अपनाने के लिए प्रेरित किया। महंगे गैजेट्स, बाहर खाना, घूमना-फिरना और जरूरत से ज्यादा खर्च धीरे-धीरे उसकी आदत बन गए।

युवक के अनुसार, सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने कमाई बढ़ने के साथ बचत और निवेश पर ध्यान नहीं दिया। उसे लगा कि अच्छी सैलरी होने के कारण पैसों की कमी कभी नहीं होगी। लेकिन समय के साथ छोटे-छोटे खर्च बड़े आर्थिक बोझ में बदल गए।

बताया गया कि उसने कई तरह के लोन और क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल किया। शुरुआत में इनकी किस्तें आसानी से चुकाई जा रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे कर्ज का दबाव बढ़ता गया। एक समय ऐसा आया जब उसकी मासिक आय का बड़ा हिस्सा सिर्फ कर्ज चुकाने में जाने लगा।

टेक इंजीनियर ने कहा कि बाहर से देखने पर उसकी जिंदगी सफल नजर आती थी, लेकिन अंदर से वह आर्थिक तनाव से गुजर रहा था। ₹2 लाख महीने की कमाई होने के बाद भी उसके पास आपात स्थिति के लिए पर्याप्त बचत नहीं थी।

उसकी कहानी वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पर जमकर चर्चा की। कई यूजर्स ने कहा कि ज्यादा कमाई का मतलब हमेशा आर्थिक मजबूती नहीं होता। अगर खर्च और बचत का संतुलन न बनाया जाए तो बड़ी आय भी कम पड़ सकती है।

वित्त विशेषज्ञ भी अक्सर सलाह देते हैं कि कमाई बढ़ने के साथ खर्च बढ़ाने के बजाय पहले बचत, निवेश और आपातकालीन फंड तैयार करना जरूरी है। क्रेडिट कार्ड और लोन का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि आसान उपलब्ध पैसा बाद में बड़ा आर्थिक दबाव बन सकता है।

इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या लोग अपनी आय के हिसाब से वित्तीय फैसले ले रहे हैं या सिर्फ दिखावे वाली लाइफस्टाइल के पीछे भाग रहे हैं।

27 साल के इस इंजीनियर की कहानी उन युवाओं के लिए एक सबक है, जो अच्छी नौकरी और ज्यादा सैलरी मिलने के बाद आर्थिक अनुशासन को नजरअंदाज कर देते हैं। कमाई कितनी भी हो, सही बजट, बचत और निवेश के बिना आर्थिक सुरक्षा हासिल करना मुश्किल हो सकता है।