20 साल की डॉक्टरी छोड़ महिला ने शुरू की पाव रोटी की दुकान, बोलीं- ‘अब जाकर मिला असली सुकून’
कहा जाता है कि जिंदगी में सफलता का मतलब हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। किसी के लिए बड़ा पद और अच्छी कमाई मायने रखती है, तो किसी के लिए अपने पसंद के काम से मिलने वाली खुशी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। ऐसी ही कहानी एक महिला डॉक्टर की है, जिन्होंने करीब 20 साल तक डॉक्टरी करने के बाद अपना पेशा छोड़ दिया और पाव रोटी की दुकान शुरू कर दी। उनका कहना है कि अब उन्हें अपने काम में वह सुकून मिल रहा है, जिसकी तलाश लंबे समय से थी।
महिला ने डॉक्टर के रूप में कई वर्षों तक काम किया। मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मरीजों का इलाज किया और अपने पेशे में लंबा समय बिताया। करीब दो दशक तक डॉक्टर के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनके परिचितों और आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया। उन्होंने डॉक्टरी छोड़कर खाने-पीने का अपना छोटा कारोबार शुरू करने का फैसला किया।
उन्होंने पाव रोटी बनाने और बेचने की शुरुआत की। शुरुआत में यह काम आसान नहीं था। डॉक्टर की नौकरी और अपनी दुकान चलाने के बीच जमीन-आसमान का अंतर था। लेकिन महिला ने इसे केवल कारोबार के तौर पर नहीं देखा। उनके लिए यह अपने पसंद के काम को जिंदगी का हिस्सा बनाने का तरीका था।
धीरे-धीरे उनकी दुकान पर लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी। ताजी पाव रोटी और अपने हाथों से तैयार किए गए उत्पाद लोगों को पसंद आने लगे। ग्राहकों की प्रतिक्रिया ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें लगा कि उन्होंने अपने लिए सही रास्ता चुना है।
महिला का कहना है कि डॉक्टरी का पेशा सम्मान और जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है, लेकिन लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि वह अपनी जिंदगी में कुछ अलग करना चाहती हैं। उन्होंने अपने मन की बात सुनी और एक नए क्षेत्र में कदम रखने का फैसला किया। उनके मुताबिक, इस बदलाव के बाद उन्हें मानसिक तौर पर काफी संतुष्टि महसूस हो रही है।
उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। लोग इस फैसले को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इतने लंबे समय तक डॉक्टर रहने के बाद पेशा छोड़ना बड़ा फैसला है, जबकि कई लोग उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं। उनका मानना है कि व्यक्ति को वही काम करना चाहिए, जिसमें उसे खुशी और संतुष्टि मिले।
इस कहानी की खास बात यह है कि महिला ने उम्र और स्थापित करियर की परवाह किए बिना अपने मन की सुनी। उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि करियर बदलने के लिए किसी खास उम्र का इंतजार जरूरी नहीं है। अगर व्यक्ति के अंदर कुछ नया करने का जुनून हो तो वह किसी भी समय नई शुरुआत कर सकता है।
आज उनकी पाव रोटी की दुकान उनके लिए सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि एक नई पहचान बन चुकी है। दो दशक तक मरीजों की सेवा करने के बाद अब वह अपने बनाए खाने के जरिए लोगों से जुड़ रही हैं। उनके शब्दों में, “अब जाकर मिला असली सुकून।” यही बात उनकी पूरी कहानी को खास बनाती है।