जमुई में बैड टच की शिकार नाबालिग का वीडियो वायरल करने वालों पर शिकंजा, 120 सोशल मीडिया अकाउंट चिह्नित
जमुई पुलिस ने उस मामले की जांच तेज़ कर दी है जिसमें सोशल मीडिया पर एक 'बिना ब्लर किया हुआ' वीडियो वायरल हुआ था—जिसमें एक नाबालिग छात्र का चेहरा दिख रहा था और उसकी पहचान उजागर हो रही थी। पुलिस उन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की सक्रिय रूप से जांच कर रही है जहां ये वीडियो पोस्ट किए गए थे। अब तक, उन्होंने जमुई ज़िले और अन्य जगहों से लगभग 120 सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है और FIR दर्ज की है।
**वीडियो फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई**
पुलिस अधीक्षक (SP) विश्वजीत दयाल ने सोमवार रात आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वीडियो फैलाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाबालिग पीड़ित की पहचान उजागर करने वाली कोई भी फ़ोटो या वीडियो सार्वजनिक रूप से साझा करना अपराध है। POCSO एक्ट की धारा 23 पीड़ित की पहचान उजागर करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करती है; इसलिए, जिन सोशल मीडिया अकाउंट ने चेहरा ब्लर किए बिना वीडियो साझा किया, उनकी पहचान की जा रही है।
**फ़ॉरवर्ड करने के बजाय तुरंत डिलीट करें**
उन्होंने बताया कि अब तक 120 सोशल मीडिया अकाउंट—जिनमें Facebook, Instagram और X (Twitter) शामिल हैं—की पहचान की जा चुकी है और इस कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। SP ने जनता से अपील की कि वे वायरल फ़ुटेज को डाउनलोड, शेयर या रीपोस्ट न करें। यदि किसी को अपने मोबाइल फ़ोन पर यह वीडियो मिलता है, तो उन्हें इसे फ़ॉरवर्ड करने के बजाय तुरंत डिलीट कर देना चाहिए। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नाबालिग की पहचान उजागर करने या वीडियो फैलाने पर POCSO एक्ट की धारा 23 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 74 के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।