अमेरिका में माता-पिता बच्चों को क्यों नहीं देते अपनी विरासत? खुद खर्च करते हैं पूरे पैसे, जानिए वजह!
भारत में अक्सर माता-पिता अपनी जिंदगी भर की कमाई और संपत्ति बच्चों के भविष्य के लिए बचाकर रखते हैं। कई परिवारों में घर, जमीन और बैंक में जमा पैसा अगली पीढ़ी को सौंपना जिम्मेदारी का हिस्सा माना जाता है। वहीं, अमेरिका में कुछ परिवारों की सोच इससे अलग दिखाई देती है। वहां कई माता-पिता अपनी रिटायरमेंट के लिए बचत करने, अपनी जरूरतों पर पैसा खर्च करने और बच्चों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते हैं। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका के सभी माता-पिता अपनी विरासत खर्च कर देते हैं या बच्चों के लिए कुछ नहीं छोड़ते।
अपनी जिंदगी और रिटायरमेंट को देते हैं प्राथमिकता
अमेरिका में कई लोग नौकरी के दौरान रिटायरमेंट के लिए अलग से पैसा जमा करते हैं। वे चाहते हैं कि उम्र बढ़ने के बाद उन्हें अपने रोजमर्रा के खर्च, स्वास्थ्य सेवाओं, घर और घूमने-फिरने के लिए बच्चों पर निर्भर न रहना पड़े।
इसी सोच के तहत कुछ माता-पिता अपनी बचत का इस्तेमाल आरामदायक जीवन जीने में करते हैं। वे यात्रा करते हैं, अपने शौक पूरे करते हैं और जरूरत के मुताबिक अपनी संपत्ति का उपयोग करते हैं। उनके लिए जरूरी यह होता है कि जीवनभर की मेहनत से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाए।
बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना भी है वजह
अमेरिका में बच्चों के बड़े होने के बाद उनसे आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने की अपेक्षा की जाती है। कई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी करते हैं, अपना घर बसाते हैं और अपने खर्चों की जिम्मेदारी खुद उठाते हैं।
कुछ माता-पिता मानते हैं कि बच्चों को पहले से बड़ी विरासत मिलने की उम्मीद के बजाय अपनी शिक्षा, करियर और आर्थिक भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, परिवारों की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। कई माता-पिता बच्चों की कॉलेज फीस, घर खरीदने या दूसरे जरूरी खर्चों में भी आर्थिक मदद करते हैं।
महंगाई और स्वास्थ्य खर्च भी बड़ी वजह
अमेरिका में रिटायरमेंट के बाद रहने का खर्च, स्वास्थ्य सेवाएं और लंबे समय तक देखभाल की जरूरतें कई परिवारों के बजट पर असर डाल सकती हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए अपनी बचत का एक हिस्सा भविष्य की जरूरतों के लिए इस्तेमाल करना जरूरी हो जाता है।
अगर कोई व्यक्ति अपनी पूरी संपत्ति बच्चों के लिए छोड़ने के चक्कर में खुद के जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा नहीं रखता, तो बुढ़ापे में आर्थिक परेशानी हो सकती है। इसलिए कुछ वित्तीय विशेषज्ञ भी रिटायरमेंट की जरूरतों का आकलन करके ही विरासत से जुड़े फैसले लेने की सलाह देते हैं।
भारत और अमेरिका की पारिवारिक सोच में अंतर
भारत में संपत्ति अगली पीढ़ी को सौंपने की परंपरा कई परिवारों में मजबूत है। घर और जमीन को केवल आर्थिक संपत्ति नहीं, बल्कि परिवार की पहचान और भविष्य की सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जाता है। दूसरी ओर, अमेरिका में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और रिटायरमेंट की वित्तीय योजना को भी काफी महत्व दिया जाता है।
लेकिन यह अंतर हर परिवार पर लागू नहीं होता। अमेरिका में भी बड़ी संख्या में माता-पिता बच्चों के लिए संपत्ति, निवेश और दूसरी वित्तीय विरासत छोड़ने की योजना बनाते हैं। इसी तरह भारत में भी कई परिवार अपनी रिटायरमेंट और व्यक्तिगत जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं।
क्या बच्चों के लिए विरासत छोड़ना जरूरी है?
विरासत छोड़ना या अपनी कमाई का इस्तेमाल खुद करना पूरी तरह व्यक्तिगत और पारिवारिक फैसला है। इसका कोई एक सही तरीका नहीं है। माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे पहले अपनी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करें और फिर अपनी परिस्थितियों के अनुसार बच्चों की मदद या विरासत की योजना बनाएं।
आखिरकार, बच्चों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना केवल संपत्ति देने तक सीमित नहीं है। उन्हें अच्छी शिक्षा, पैसे का सही प्रबंधन और आत्मनिर्भर बनने की सीख देना भी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वहीं, आर्थिक रूप से सक्षम माता-पिता अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा बच्चों के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।
इसलिए अमेरिका में माता-पिता अपनी विरासत क्यों नहीं छोड़ते, इसका जवाब यह नहीं है कि वे बच्चों की परवाह नहीं करते। बल्कि कई परिवारों में अपनी जरूरतों, रिटायरमेंट की सुरक्षा और बच्चों की आर्थिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने को प्राथमिकता दी जाती है।

