उज़्बेकिस्तान गुलाम नहीं होने के बाद भी क्यों मनाता है स्वतंत्रता दिवस? 35 साल पहले ऐसा क्या हुआ था; जानिए
आज यानी 1 सितंबर को उज़्बेकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। साल 2026 में देश अपनी स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ मना रहा है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब उज़्बेकिस्तान भारत की तरह किसी यूरोपीय औपनिवेशिक सत्ता का गुलाम नहीं था, तो फिर वहां स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है? इसका जवाब सोवियत संघ के इतिहास में छिपा है।
उज़्बेकिस्तान किसके अधीन था?
उज़्बेकिस्तान लंबे समय तक सोवियत संघ यानी USSR का हिस्सा था। वह औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र देश नहीं, बल्कि Uzbek Soviet Socialist Republic के रूप में सोवियत संघ की 15 संघीय गणराज्यों में शामिल था।
इसलिए यहां ‘गुलामी’ शब्द को भारत में ब्रिटिश शासन वाली स्थिति के अर्थ में समझना सही नहीं होगा। उज़्बेकिस्तान पर ब्रिटेन जैसा औपनिवेशिक शासन नहीं था, बल्कि उसकी राजनीतिक व्यवस्था सोवियत संघ के संघीय ढांचे का हिस्सा थी।
उज़्बेकिस्तान की सरकार के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, देश ने 20 जून 1990 को राज्य संप्रभुता की घोषणा की थी। इसके बाद सोवियत संघ में तेजी से बदलते राजनीतिक हालात ने पूर्ण स्वतंत्रता का रास्ता तैयार किया।
31 अगस्त 1991 को लिया गया ऐतिहासिक फैसला
साल 1991 में सोवियत संघ गंभीर राजनीतिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा था। अगस्त 1991 में मॉस्को में सोवियत नेतृत्व के खिलाफ तख्तापलट की असफल कोशिश हुई। इसके बाद सोवियत गणराज्यों में स्वतंत्रता की मांग और तेज हो गई।
इसी माहौल में 31 अगस्त 1991 को ताशकंद में उज़्बेक SSR की सुप्रीम काउंसिल का असाधारण सत्र हुआ। इसमें राज्य की स्वतंत्रता घोषित करने का प्रस्ताव और ‘राज्य स्वतंत्रता की बुनियाद’ संबंधी कानून स्वीकार किया गया। उसी दिन उज़्बेक SSR का नाम बदलकर रिपब्लिक ऑफ उज़्बेकिस्तान कर दिया गया।
फिर 1 सितंबर को ही क्यों मनाते हैं?
दिलचस्प बात यह है कि स्वतंत्रता की घोषणा 31 अगस्त को हुई थी, लेकिन राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस 1 सितंबर को रखा गया।
उज़्बेकिस्तान के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 31 अगस्त के ऐतिहासिक फैसले के साथ ही 1 सितंबर को स्वतंत्रता दिवस और राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया था। 1992 में पहली बार स्वतंत्रता दिवस आधिकारिक रूप से मनाया गया।
यानी आज 1 सितंबर 2026 को उज़्बेकिस्तान की आजादी के 35 साल पूरे हो रहे हैं।
सोवियत संघ भी उसी साल खत्म हुआ
एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि उज़्बेकिस्तान की स्वतंत्रता सोवियत संघ के औपचारिक विघटन से कुछ महीने पहले घोषित हुई थी। सोवियत संघ का आधिकारिक अंत दिसंबर 1991 में हुआ। इस तरह उज़्बेकिस्तान उन गणराज्यों में शामिल था, जिन्होंने USSR के खत्म होने से पहले ही अपनी स्वतंत्रता घोषित कर दी थी।
आज कैसे मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस?
उज़्बेकिस्तान में 1 सितंबर सबसे बड़े राष्ट्रीय त्योहारों में से एक है। देशभर में सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत और नृत्य कार्यक्रम, खेल प्रतियोगिताएं, मेले और आतिशबाजी आयोजित की जाती हैं। राजधानी ताशकंद में भी बड़े स्तर पर समारोह होते हैं।
इसलिए सवाल का सीधा जवाब यह है कि उज़्बेकिस्तान भारत की तरह किसी विदेशी औपनिवेशिक शासन से आजाद होने की याद में नहीं, बल्कि सोवियत संघ से अलग होकर एक संप्रभु राष्ट्र बनने की ऐतिहासिक घटना की याद में स्वतंत्रता दिवस मनाता है। 31 अगस्त 1991 को स्वतंत्रता की घोषणा हुई और 1 सितंबर को उसका राष्ट्रीय उत्सव बनाया गया।

