शिकार खाते समय क्यों निकलते हैं मगरमच्छ की आंखों से आंसू? 'क्रोकोडाइल टियर्स' के पीछे छिपा है ये वैज्ञानिक कारण
आपने अक्सर सुना होगा कि कोई व्यक्ति दिखावे के लिए दुखी होने का नाटक करे तो उसे "मगरमच्छ के आंसू बहाना" कहा जाता है। यह कहावत सदियों से चली आ रही है, लेकिन क्या सच में मगरमच्छ अपने शिकार को खाते समय रोता है? वैज्ञानिकों के अनुसार, मगरमच्छ की आंखों से निकलने वाला तरल भावनाओं से जुड़ा नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक खास जैविक प्रक्रिया होती है।
दरअसल, शिकार को खाते समय मगरमच्छ की आंखों से पानी निकल सकता है, जिसे देखकर लोग इसे उसके रोने से जोड़ देते हैं। लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यह आंसू असल में आंखों के पास मौजूद ग्रंथियों (Glands) से निकलने वाला तरल होता है।
जबड़े के दबाव से निकलता है तरल
वैज्ञानिकों के मुताबिक, मगरमच्छ जब अपने शिकार को मजबूती से पकड़कर चबाता है तो उसके जबड़े की मांसपेशियों और आसपास के हिस्सों पर काफी दबाव पड़ता है। इस दबाव की वजह से आंखों के पास मौजूद लैक्रिमल ग्लैंड्स (Lacrimal Glands) सक्रिय हो सकती हैं और वहां से तरल बाहर निकलने लगता है।
यह प्रक्रिया इंसानों के रोने जैसी नहीं होती। मगरमच्छ को उस समय कोई भावनात्मक दुख या दर्द महसूस होने की वजह से आंसू नहीं आते।
क्या है 'क्रोकोडाइल टियर्स' का मतलब?
"क्रोकोडाइल टियर्स" शब्द का इस्तेमाल दुनिया भर में किसी झूठे या दिखावटी दुख के लिए किया जाता है। यह मुहावरा इसी धारणा से जुड़ा है कि मगरमच्छ शिकार खाते समय रोने का नाटक करता है।
हालांकि, वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो मगरमच्छ का यह व्यवहार पूरी तरह प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। इसमें किसी तरह का छल या भावना शामिल नहीं होती।
मगरमच्छ की आंखों की खासियत
मगरमच्छ की आंखें उसके शिकार करने के तरीके का अहम हिस्सा होती हैं। उसकी आंखों पर एक विशेष झिल्ली (Nictitating Membrane) होती है, जो पानी के अंदर देखने और आंखों की सुरक्षा में मदद करती है।
इसके अलावा मगरमच्छ की आंखों के आसपास की संरचना इस तरह विकसित हुई है कि शिकार करते समय भी उसकी आंखें सुरक्षित रह सकें।
वैज्ञानिकों ने समझाया असली कारण
शोधकर्ताओं ने पाया है कि मगरमच्छ, घड़ियाल और कुछ अन्य सरीसृपों में शिकार करते समय आंसू जैसी प्रक्रिया देखी जाती है। यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है, न कि किसी भावना का संकेत।
इसलिए अगली बार जब आपको मगरमच्छ की आंखों से पानी निकलता दिखाई दे तो इसे उसका "रोना" न समझें। यह प्रकृति द्वारा बनाई गई एक अनोखी जैविक प्रक्रिया है, जो उसके शरीर के काम करने के तरीके का हिस्सा है।

