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भारत का पहला आधार कार्ड किसे मिला था? जानिए कौन थीं देश की पहली आधार कार्ड धारक और कैसे बनीं इतिहास का हिस्सा

भारत का पहला आधार कार्ड किसे मिला था? जानिए कौन थीं देश की पहली आधार कार्ड धारक और कैसे बनीं इतिहास का हिस्सा

भारत में आज आधार कार्ड हर नागरिक की पहचान का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाता खुलवाने से लेकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक, लगभग हर जरूरी काम में आधार की जरूरत पड़ती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का पहला आधार कार्ड किसे जारी किया गया था? क्या वह व्यक्ति पुरुष था या महिला? आइए जानते हैं भारत की पहली आधार कार्ड धारक के बारे में।

भारत का पहला आधार कार्ड महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले की रहने वाली महिला रंजना सोनावणे को जारी किया गया था। वह देश की पहली आधार कार्ड धारक बनी थीं। उन्हें यह ऐतिहासिक पहचान पत्र 29 सितंबर 2010 को जारी किया गया था। उस समय आधार योजना की शुरुआत ही हुई थी और सरकार ने इसे देश के हर नागरिक को एक विशिष्ट पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम बताया था।

क्यों चुना गया रंजना सोनावणे को?

रंजना सोनावणे को पहला आधार कार्ड देने के पीछे वजह थी कि उनका गांव आधार नामांकन की शुरुआती प्रक्रिया में शामिल किए गए क्षेत्रों में से एक था। महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के तेम्बली गांव को देश के पहले आधार नामांकन केंद्रों में शामिल किया गया था। इसी गांव की निवासी होने के कारण रंजना सोनावणे को सबसे पहले आधार संख्या जारी की गई।

पहला आधार कार्ड जारी करने के मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थे। इस कार्यक्रम को भारत में डिजिटल पहचान प्रणाली की शुरुआत के रूप में देखा गया।

कैसे हुई आधार योजना की शुरुआत?

भारत में आधार परियोजना की शुरुआत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के माध्यम से की गई थी। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक निवासी को एक 12 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या देना था, जिससे सरकारी सेवाओं और योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सके।

शुरुआत में आधार को लेकर कई चुनौतियां भी थीं। लोगों को इसके महत्व के बारे में जागरूक करना, दूर-दराज इलाकों में नामांकन केंद्र पहुंचाना और बायोमेट्रिक जानकारी जुटाना बड़ी चुनौती थी। लेकिन समय के साथ आधार देश की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणालियों में शामिल हो गया।

आज करोड़ों लोगों की पहचान बना आधार

आज आधार कार्ड का इस्तेमाल लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है। बैंकिंग, मोबाइल सिम, आयकर सेवाएं, सरकारी सब्सिडी, पेंशन, छात्रवृत्ति और कई अन्य योजनाओं में आधार की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

पहली आधार कार्ड धारक रंजना सोनावणे का नाम अब भारत के डिजिटल इतिहास में दर्ज हो चुका है। एक छोटे से गांव की महिला को मिला यह पहला आधार कार्ड आगे चलकर करोड़ों भारतीयों की पहचान का आधार बन गया।

भारत की आधार यात्रा एक साधारण पहचान पत्र से शुरू हुई थी, लेकिन आज यह देश के डिजिटल विकास की सबसे बड़ी नींव में से एक बन चुकी है।

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