जब 2 लाख रुपये सैलरी हो जाए तो जॉब बदलते वक्त ध्यान रखें 4 बातें, कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजिस्ट ने दिए टिप्स
आज के समय में अच्छी सैलरी वाली नौकरी मिलना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। खासकर जब किसी कर्मचारी की मासिक कमाई 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा हो जाए तो नौकरी बदलने का फैसला काफी सोच-समझकर लेना चाहिए। ज्यादा सैलरी के चक्कर में जल्दबाजी में लिया गया फैसला कई बार करियर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। एक कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजिस्ट ने हाई इनकम वाले प्रोफेशनल्स को नौकरी बदलते समय चार अहम बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है।
पहली बात है केवल सैलरी देखकर फैसला न लेना। नई कंपनी अगर मौजूदा नौकरी से ज्यादा पैकेज ऑफर कर रही है तो यह आकर्षक जरूर लग सकता है, लेकिन इसके साथ मिलने वाली जिम्मेदारियों, काम के घंटे, बोनस, स्टॉक ऑप्शन और अन्य सुविधाओं को भी समझना जरूरी है। कई बार कागज पर ज्यादा पैकेज दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक इन-हैंड सैलरी या अन्य लाभ उम्मीद से कम हो सकते हैं।
दूसरी बात करियर ग्रोथ से जुड़ी है। नौकरी बदलने से पहले यह देखना चाहिए कि नई भूमिका आपको आगे बढ़ने का कितना मौका देगी। क्या वहां नई स्किल सीखने का अवसर मिलेगा? क्या बड़ी टीम संभालने या महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिलेगा? अगर नई नौकरी सिर्फ थोड़ी ज्यादा सैलरी देती है लेकिन भविष्य में विकास की संभावनाएं सीमित हैं तो फैसला दोबारा सोचने की जरूरत है।
तीसरी जरूरी बात कंपनी की स्थिरता और भविष्य की संभावनाओं को समझना है। खासकर प्राइवेट सेक्टर में नौकरी बदलते समय कंपनी की आर्थिक स्थिति, बिजनेस मॉडल और इंडस्ट्री में उसकी स्थिति के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए। केवल इंटरव्यू के दौरान मिली जानकारी के आधार पर फैसला करना सही नहीं माना जाता। कंपनी में कर्मचारियों की स्थिति और वहां का वर्क कल्चर भी समझना चाहिए।
चौथी बात वर्क-लाइफ बैलेंस और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं की है। ज्यादा सैलरी के साथ अगर काम का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाए, लगातार लंबे घंटे काम करना पड़े या परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय न बचे तो कुछ समय बाद नौकरी असंतोष का कारण बन सकती है। इसलिए नई नौकरी स्वीकार करने से पहले ऑफिस लोकेशन, काम के घंटे, हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम की सुविधा और छुट्टियों जैसी चीजों की जानकारी लेना जरूरी है।
कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजिस्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, नौकरी बदलने का फैसला भी ज्यादा रणनीतिक होना चाहिए। करियर के शुरुआती दौर में जहां अनुभव और सीखने को प्राथमिकता दी जा सकती है, वहीं 2 लाख रुपये या उससे ज्यादा मासिक सैलरी के स्तर पर भूमिका, भविष्य की ग्रोथ, कंपनी की स्थिरता और व्यक्तिगत जीवन का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।
इसलिए अगली बार नौकरी बदलते समय सिर्फ यह न देखें कि नई कंपनी कितनी ज्यादा सैलरी दे रही है। यह भी देखें कि वह नौकरी आपके करियर और जीवन को अगले कुछ वर्षों में किस दिशा में ले जा सकती है।

